Pilibhit: पूर्व मंत्री ने छोड़ी साइकिल की सवारी, पकड़ा कमल का साथ...जिलाध्यक्ष बोले- सत्तालोभी हैं हेमराज
लखनऊ में सदस्यता की ग्रहण, तराई में बढ़ी राजनीतिक हलचल
फोटो- लखनऊ में भाजपा की सदस्यता लेते पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा।
पीलीभीत, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के नेता हेमराज वर्मा के दल बदलने की लंबे समस से चली आ रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग ही गया। साइकिल की सवारी छोड़ हेमराज वर्मा ने कमल का साथ पकड़ा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष लखनऊ में उन्होंने सदस्यता ग्रहण की। इसके फोटो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुए जनपद की सियासत भी गरमा गई।
विधायकी का पहला चुनाव हेमराज वर्मा ने सदर विधानसभा सीट पर बसपा के टिकट पर 2007 में लड़ा था। उन्हें 25000 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे थे। उसके बाद उन्होंने हाथी की सवारी छोड़ साइकिल पर सवार हो गए थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में हेमराज वर्मा बरखेड़ा विधानसभा सीट पर सपा के टिकट से विधायक बने।
अखिलेश सरकार में उन्हें खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री भी बनाया गया। फिर समाजवादी पार्टी से उन्होंने 2017 और 2022 में भी विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गए। एक बार लोकसभा का चुनाव भी सपा के टिकट पर सांसद वरुण गांधी के खिलाफ लड़ा, लेकिन जीत दर्ज नहीं करा सके थे। पिछले काफी समय से उनके सत्ताधारी दल भाजपा में जाने की अटकलें तेज हो गई थी।
एक दिन पहले ही ऑडियो वायरल हुई थी। जिसमें एक कार्यकर्ता द्वारा पूर्व मंत्री से इसे संबंध में बातचीत की जा रही थी। अब बुधवार को जब हेमराज वर्मा के भाजपा में चले जाने के फोटो सामने आए तो निकाय चुनाव के बीच राजनीतिक हलचल बढ़ी रही। पूर्व मंत्री के भाजपा में जाने के इस फैसले को लोकसभा चुनाव 2024 से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
जनपद में पहले ही लोकसभा चुनाव को लेकर दो दिग्गजों की खींचतान चरम पर दिखाई दे रही है। ऐसे में चर्चाएं यह भी तेज हो गई हैं कि अब अगर यह सही है तो लोकसभा चुनाव और भी रोचक त्रिकोणीय मोड़ पर पहुंच सकता है।
सत्तालोभ में बसपा से सपा में आए और अब भाजपा में गए हेमराज
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा के भाजपा में जाने को लेकर एक बयान जारी किया। कहा कि समाजवादी पार्टी ने हेमराज को पूरा सम्मान व प्रतिनिधित्व दिया। मगर, अतिमहत्वाकांक्षा में उनका निर्णय व्यक्तिगत है। 2012 में उन्हें बरखेड़ा से टिकट देकर विधायक और अखिलेश सरकार में मंत्री बनाया।
अपने ही समाज में नाराजगी व जनाधार खिसक जाने के कारण विधानसभा चुनाव 2017 व 2022 में उन्हें बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में परास्त होना पड़ा था। पंचायत चुनाव 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी उनकी भूमिका संदिग्ध रही। इसकी जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रदेश नेतृत्व को थी। 2022 में मिली शिकस्त के बाद से ही सत्ताधारी दल से जुड़ने का मन हेमराज बना चुके थे। सत्ता के लालच व राजनैतिक अतिमहत्वाकांक्षा के कारण ही उन्होंने सत्ताधारी दल को चुना है।
सत्तालोभ के कारण ही वह बसपा से सपा में आए थे और अब भाजपा में चले गए। अपने ही समाज के नकारे व जनाधार खोए व्यक्ति को भाजपा शामिल कर रही है। इस बात से भाजपा की कमजोरी भी जगजाहिर होती है। समाजवादी पार्टी पर इसका कोई फर्क नही पड़ेगा।
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