मुरादाबाद : मतगणना से पहले परिणाम का आकलन करने में जुटे प्रत्याशी, बूथवार मिले वोट का लगा रहे हिसाब

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Edited By Amrit Vichar
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अपना बूथ कितना मजबूत की तर्ज पर मतदान एजेंटों से कर रहे मंथन, नगर निगम चुनाव में महापौर के लिए सिर्फ 43.32 प्रतिशत मतदान ने बढ़ाई बेचैनी

मुरादाबाद, अमृत विचार। नगर निगम और अन्य नगर निकायों में मतदान के बाद अब परिणाम का आकलन करने में प्रत्याशी जुट गए हैं। वे अपने मतदान अभिकर्ताओं से बूथवार वोट का जोड़ घटाना कर अपनी जीत के प्रति आश्वस्त होने में लगे हैं। ईवीएम का लॉक खुलने से पहले वे मिले वोट का हिसाब लगा रहे हैं। जिससे मतगणना के पहले ही वोटों का आंकड़ा साफ हो सके।

मतदान के दिन के रुझानों से महापौर पद के दलीय प्रत्याशी अब शुक्रवार को परिणाम का हिसाब लगाने में लगे रहे। किसी ने चुनाव कार्यालय तो किसी ने घर पर ही समर्थकों और शुभचिंतकों के साथ बैठक कर वोटरों की खामोशी को भांपा। भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा, आम आदमी पार्टी आदि के प्रत्याशी दोपहर तक चुनावी दौड़ भाग की खुमारी उतारने के बाद वोटों का गणित बैठाने में लगे। अपने पसंदीदा प्रत्याशियों के पास बैठकर जीत के दावे का आधार बताते रहे।

महापौर पद के प्रत्याशियों ने अपने दल के वार्ड पार्षद प्रत्याशियों से भी उनके वार्ड में पार्टी के आधार पर मिले वोटों की जानकारी जुटाई। हालांकि कई वार्डों में विचित्र स्थिति भी रही। कई मतदाता वार्ड पार्षद में भाजपा को वोट दिए तो महापौर में दूसरे दल के प्रत्याशी को पसंद मान कर उनके नाम के आगे का बटन दबाया। इससे प्रत्याशियों के दिलों के धड़कनें बढ़ी हुईं हैं। किसी ने पार्षद में वार्ड के समीकरणों को देख मतदान किया। इन बेमेल समीकरणों का असर भी महापौर की जीत हार पर पड़ना तय है। मतदाताओं का रुख भांपने में दलों के बूथ कार्यकर्ता भी असफल रहे।

बूथों पर मजबूती का जीत में बड़ा हाथ
बूथ जीता, चुनाव जीता का नारा देने वाले दलों के रणनीतिकार अपने इस फार्मूले पर काफी हद तक सफल रहे। लेकिन कई बूथों पर अपनी जीत पक्की मानकर चलने वाले प्रत्याशियों को भी इस बार मतदाताओं के रिवर्स स्विंग ने गच्चा देने का काम किया है। इस चुनाव में कई खांटी दलीय निष्ठा वाले भी अपने चहेते चेहरे को टिकट न मिलने से खफा होने का बदला ईवीएम और बैलेट पेपर से वोट देते समय पार्टी के रणनीतिकारों से चुपके से ले लिया। आखिरी दिनों में ऐसे मतदाताओं और टिकट न मिलने से नाराज चेहरों को साधने का कितना प्रभाव जीत हार पर पड़ेगा यह तो 13 मई को मतगणना के समय ईवीएम का लॉक और मतपेटिका की सील खुलने पर ही पता चलेगा।

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