Bareilly: दोगुनी से भी तेज हुई कुत्तों के हमलों की रफ्तार, कइयों को बना चुके शिकार
पिछले साल रोज सौ लोगों को एआरवी लगाने का औसत था, इस बार दो सौ के भी पार
बरेली, अमृत विचार। कुत्तों के हमले किसी चुनाव में मुद्दा नहीं बनते लेकिन इन हमलों की रफ्तार इस कदर तेजी से बढ़ रही है कि शहर से देहात तक लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गए हैं। हालत यह है कि कुत्तों के काटने के बाद सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने पहुंच रहे लोगों का औसत चार महीनों में ही पिछले साल की तुलना में दोगुने से ज्यादा हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक तीन सौ बेड अस्पताल में पिछले साल तक रोज औसतन सौ लोग एआरवी लगवाने आते थे, लेकिन इस साल यह संख्या दो सौ के पार निकल गई है।
तीन सौ बेड अस्पताल के एआरवी केंद्र प्रभारी डॉ. शैलेष रंजन के मुताबिक जिले में कुत्ते काटने के सबसे ज्यादा मामलों की संख्या दूसरे जिलों की तुलना में काफी ज्यादा है। वर्ष 2022 में 21473 लोग कुत्ते के काटने के बाद तीन सौ बेड अस्पताल में वैक्सीन लगवाने पहुंचे थे लेकिन वर्ष 2023 इनकी संख्या और बढ़ती दिख रही है।
अब तक जनवरी में 1400, फरवरी में 1478, मार्च में 1934 और अप्रैल में 1616 मरीजों को एआरवी लगाई जा चुकी है। जो पिछले साल के शुरुआती महीनों की तुलना में करीब-करीब दोगुनी है। गर्मी में हमले और तेज होते हैं। अगर साल के अंत तक यही रफ्तार बनी रही तो दिसंबर तक पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा लोगों को एआरवी लगाए जाने की संभावना है।
गंभीर स्थिति यह है कि कुत्तों के हमलों की संख्या ही नहीं बढ़ रही बल्कि ये हमले अब जानलेवा भी होते जा रहे हैं। जिले में तमाम बच्चों की इन हमलों में घायल होने के बाद मौत हो ही चुकी है, इसके अलावा रैबीज की वजह से भी जानें जा रही हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल जिले में आठ लोगों की रैबीज से मौत हो चुकी है। मरने वालों में सभी आयु वर्ग के लोग शामिल थे।
और ज्यादा खूंखार हो रहे हैं कुत्ते, इस साल...गंभीर घाव वाले मरीजों की भी संख्या बढ़ी
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक इस साल कुत्तों के हमले के तमाम केस ऐसे आए हैं जिनमें हमले का शिकार हुए लोगों के जिस्म गंभीर घाव थे। कारण यह माना जा रहा है कि कुत्तों ने सिर्फ उन पर गुस्से में काटने के लिए हमला नहीं किया बल्कि वे उन्हें शिकार बनाना चाहते थे। डॉक्टरों के मुताबिक गंभीर घाव वाले केस में मरीज को एंटी रैबीज सीरम की जरूरत होती है, लेकिन शासन की ओर से अब तक सीरम उपलब्ध नहीं कराया गया है। मरीजों की फिलहाल बाजार से ही सीरम खरीदना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की छुट्टियां भी भारी पड़ रही हैं कुत्तों के हमलों का शिकार हुए लोगों पर
इन दिनों तीन सौ बेड अस्पताल में ओपीडी के दौरान सबसे ज्यादा लंबी लाइन एआरवी केंद्र के बाहर ही होती है लेकिन सरकारी अवकाश के दिन तमाम मरीजों को यहां से मायूस होकर लौटना पड़ता है।
दरअसल शासन की ओर से तीन सौ बेड अस्पताल के एआरवी केंद्र को मॉडल क्लिनिक बनाने का आदेश दिया गया है। ऐसा होने से यहां मरीजों को 24 घंटे वैक्सीन की सुविधा मिलेगी, लेकिन विभागीय अफसरों की बेपरवाही की वजह से यह योजना लटकी पड़ी है और मरीजों को छुट्टियों में वैक्सीन लगवाने के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
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