बौद्धिक संपदा अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण : डॉ. रोहित सिंह

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Edited By Amrit Vichar
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बस्ती, अमृत विचार। बौद्धिक संपदा अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इस मुद्दे पर बुद्धजीवियों और अनुसंधाकर्ताओं को गंभीर चिंतन करना होगा। यह कहना है एपीएन पीजी कॉलेज के समाज शास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रोहित सिंह का। वह मंगलवार को नैक, आईक्यूएसी के द्वारा रिसर्च मेथोडोलॉजी और आईपीआर विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे रहे। 

डॉ. रोहित सिंह ने बौद्धिक अधिकारों के विषय में कहा कि हमारे देश में बौद्धिक संपदाओं की कमी नहीं है, लेकिन अज्ञानता होने के कारण हमारे देशवासी अपनी मौलिकताओं का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। संगोष्ठी को एपीएन पीजी कॉलेज के शिक्षा शास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ.रघुनाथ चौधरी ने भी अपने विचार रखे और बौद्धिक अधिकार के प्रति सचेत होने की बात कही। 

इससे पूर्व महिला पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रो.सुनीता तिवारी आदि ने मां सरस्वती की चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित व माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ प्राचार्य प्रो.सुनीता तिवारी ने अतिथि स्वागत भाषण और विषय प्रवर्तन कर किया। संगोष्ठी में प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता डॉ.रघुनाथ चौधरी द्वारा अनुसंधान प्रविधि पर अत्यंत विस्तृत एवं ज्ञानवर्द्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने अनुसंधान प्रविधि को व्याख्यायित करते हुए कहा कि नवीन ज्ञान की प्राप्ति के लिए किया गया व्यवस्थित प्रयास ही अनुसंधान है।

अतिथियों का स्वागत स्नातकोत्तर समाज शास्त्र विभाग के प्रभारी डॉ. रघुवर पांडेय ने माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ.सुधा त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम की समन्वयक डॉ.रुचि श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ. सीमा सिंह, डॉ. स्मिता सिंह, डॉ. नूतन यादव, डॉ. वीना सिंह, प्रियंका सिंह, डॉ. सन्तोष यदुवंशी, नेहा परवीन, मोनी पांडेय, गिरिजा नंद राव, अरुण मणि त्रिपाठी, सूर्या उपाध्याय, पूनम यादव के साथ महाविद्यालय की समस्त छात्राएं उपस्थित रहीं।

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