बरेली: वोट की होड़ में लगाया पूरा जोर...कहीं रोड शो तो किसी ने निकाली बाइक रैली, अब थम गया चुनाव प्रचार का शोर
बरेली, अमृत विचार। निकाय चुनाव को लेकर आज छह बजे चुनाव प्रचार प्रसार थम चुका है, लेकिन उससे पहले भाजपा, सपा और कांग्रेस समेत सभी दल अपनी पूरी ताकत प्रचार-प्रसार में झोंक दी। भाजपा के महापौर उम्मीदवार जहां आज सड़क पर रोड शो करते नजर आए तो वहीं सपा के डॉक्टर आईएस तोमर ने अपने समर्थकों के साथ बाइक रैली निकाल कर अपने-अपने समर्थन में वोट मांगे। 11 तारीख को शहर में दूसरे चरण में चुनाव सम्पन्न होना है, जिसको लेकर आज छह बजे से चुनाव प्रचार रुक गया।
वोटरों को अपने पक्ष में रिझाने के लिए आज पूर्व महापौर उमेश गौतम ने अपने समर्थकों के साथ रोड शो के जरीए वोटरों से जनसम्पर्क किया। इस दौरान उनके समर्थन में मीरगंज विधायक डाक्टर एमपी आर्या, भाजपा के पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल समेत तमाम वरिष्ठ नेता जोश में भरे नजर आए। रोड शॉ में भागड़े की धुन पर जमकर कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाए और महापौर उम्मीदवार उमेश गौतम के पक्ष में वोट करने की अपील की। इस दौरान पूरा माहौल भगवा नजर आया। वहीं मुस्लिम महिलाओं ने रोड शो में फूलों की माला पहनाकर सभी का स्वागत किया।
वहीं सपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार डाक्टर आईएस तोमर के समर्थन में बाइक रैली निकाली गई। यह बाइक रैली सुबह दस बजे से तिकल इंटर कालेज से शुरू हुई। साहूकारा, कुतुबखाना, आलमगिरीगंज, बांसमंडी, साहूगोपीनाथ , श्यामतगंज, कालीबाडी से बरेली कालेज गेट से रामपुर गार्डन चुनाव कार्यालय पर सम्पन्न हुई।
इसके बाद डाक्टर आईएस तोमर अपने समर्थकों के साथ जिला अस्पताल पहुंचे और वहां वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माला अर्पित की। महाराणा प्रताप के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके बताए गए मार्ग पर चलने की बात की। वहीं कांग्रेस के महापौर उम्मीदवार डाक्टर केबी त्रिपाठी, बसपा के युसुफ जरीवाला भी जनसम्पर्क में लगे हुए हैं।
मुस्लिम मतदाताओं की खामोशी ने बढ़ाया शहर की सियासत का पारा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, 2022 के बाद नगर निकाय चुनाव, 2023 पर सभी सियासी दलों की निगाह लगी है क्योंकि, नगर निकाय चुनाव को लोकसभा चुनाव 2024 का सेमीफाइनल माना जा रहा है। बरेली की निकायों में करीब 13.32 लाख मतदाता है। इसमें नगर निगम में 8.47 लाख मतदाता हैं।
नगर निगम में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 3.75 लाख है, लेकिन इस बार मुस्लिम मतदाता खामोश है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तरह मुस्लिम मतदाताओं, और मोहल्लों में शोर शराबा नहीं है। वह पूरी तरह से चुप हैं। उनका रुख भांपने की कोशिश में भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा नेता लगे हैं, लेकिन वह भी कुछ नहीं समझ पा रहे हैं।
बरेली में मुस्लिम मतदाताओं का ध्यान पार्टियों से अधिक चेहरों पर है। वार्ड पार्षद में सपा, कांग्रेस के साथ ही भाजपा भी है, तो वहीं मेयर (महापौर) चुनाव में सबसे अधिक वोट निर्दलीय सपा समर्थित उम्मीदवार पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर की तरफ जाने की उम्मीद है। पढ़ा लिखा मुस्लिम मतदाता कांग्रेस को वोट देने की बात कर रहा है। उनका कहना है कि देश को एकता और आगे बढ़ाने की बात सिर्फ कांग्रेस करती है। भाजपा से असली लड़ाई कांग्रेस लड़ रही है। वहीं देश के मुद्दों पर बात करते हैं, बाकी दलों कि कहीं ना कहीं भाजपा से मिली भगत है। इसलिए कांग्रेस हारे या जीते, लेकिन वोट कांग्रेस को देंगे।
उलमा की अपील नजरअंदाज
बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी को उतारा है, लेकिन मुस्लिम मतदाता का फोकस बसपा प्रत्याशी पर नहीं है। मुस्लिम उलमा बार-बार बसपा प्रत्याशी को वोट देने की अपील कर रहे हैं, लेकिन यह अपील भी बेअसर साबित हो रही है। मुस्लिमों का फोकस एकतरफा नजर नहीं आ रहा है। काफी कम है। जिस तरह भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम पर ध्यान दिया है और निकाय चुनाव में उन्हें टिकट दिए हैं, उससे मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा भाजपा को भी मिलने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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