लखीमपुर-खीरी: सात टीमें, तमाम तामझाम.. हाथ नहीं आए खाकी पर गोली चलाने वाले बदमाश
20 दिन बीतने के बाद भी हाथ खाली, रडार पर आए गैंग से भी नहीं मिला कोई क्लू
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। हेड कांस्टेबल को गोली मारकर घायल करने वाले शातिर बदमाशों की खोजबीन में जुटी पुलिस के हाथ 20 दिन बाद भी खाली हैं। अब तक की जांच में पुलिस के हाथ ऐसे कोई क्लू नहीं लगे हैं, जिनसे जांच में जुटी टीमें बदमाशों तक पहुंच सके। अफसर शीघ्र खुलासा होने की बात कहकर सिर्फ अंधेरे में ही हाथ पैर मार रहे हैं।
थाना मैगलगंज क्षेत्र में लिधियाई मोड़ पर 24 अप्रैल की आधी रात के बाद पुलिस और बदमाशों की मुठभेड़ हो गई थी। कोबारा मोबाइल के साहसी हेड कांस्टेबल अनिल सिंह चौहान ने एक मकान में लूटपाट का प्रयास कर रहे एक बदमाश को दबोच लिया था।
करीब दस मिनट तक दोनों के बीच खूब गुत्थमगुत्था हुई थी। इसी बीच एक बदमाश ने सिपाही को तमंचे से गोली मार दी थी, जिससे सिपाही गंभीर रूप से घायल हो गया था। साथी सिपाही राहुल की सूचना पर थाना मैगलगंज समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची थी।
पुलिस ने घायल हेड कांस्टेबल को लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया था। एसपी के आदेश पर जिले की सीमाएं सील कर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। मौके पर पहुंचे एसपी एसपी गणेश प्रसाद साहा के नेतृत्व में पुलिस की टीमों ने बदमाशों की तलाश की, लेकिन बदमाश पुलिस के हाथ नहीं लग सके थे।
एसपी गणेश प्रसाद साहा ने बदमाशों की तलाश में सात टीमें लगाई थी। प्रतिदिन टीमों की प्रगति की समीक्षा भी एसपी कर रहे थे। क्राइम ब्रांच की स्वॉट टीम और सर्विलांस टीम को भी लगाया था। जिले की सीमा से जुड़े सीतापुर, हरदोई और शाहजहांपुर पुलिस के सहयोग से टीमें आसपास के जनपदों में भी धूल फांकती रहीं।
पिछले हफ्ते एसपी गणेश प्रसाद साहा ने दावा किया था कि जांच में लगी टीमों ने कुछ बदमाशों के ग्रुपों को चिन्हित किया है और घटना में शामिल बदमाश इन्हीं ग्रुपों के हैं। पुलिस ने चिन्हित ग्रुपों के करीब छह से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर अब तक पूछताछ कर चुकी है, लेकिन पुलिस के हाथ अभी तक ऐसे कोई क्लू नहीं आए हैं, जिनसे पुलिस बदमाशों तक पहुंच सके। इससे एसपी का दावा खोखला साबित होता दिख रहा है।
वहीं घटना के पूरे 20 दिन बीत चुके हैं। मुजरिमों को पाताल से खोज लाने में महारत हासिल करने वाली पुलिस को अपने ही हमलावर को खोजने में पसीने छूट रहे हैं। क्राइम ब्रांच की स्वॉट टीम और सर्विलांस टीम की तमाम कोशिशें भी अभी तक बेनतीजा रहीं हैं। करीब 40 से अधिक मोबाइल टावरों का बीटीएस खंगालने के बाद भी पुलिस की टीमें अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची हैं।
खास बात यह है कि टीमें अभी तक यह भी साफ नहीं कर सकी हैं कि घटना में शामिल बदमाश जिले के ही रहने वाले हैं या फिर जिले की सीमा से जुड़े अन्य जनपदों के। अफसर हर बार शीघ्र खुलासा होने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं। करीब तीन हफ्ते तक पड़ोसी जनपदों की खाक छान रही पुलिस की जांच भी अब सुस्त होती दिख रही है। एसपी गणेश प्रसाद साहा का कहना है कि टीमें अपना काम कर रही हैं। जल्द ही बदमाश पकड़े जाएंगे।
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