बरेली: उम्र के आखिरी पड़ाव पर कमर तोड़ रही वृद्धावस्था पेंशन
बरेली,अमृत विचार। सरकारी योजनाएं यूं तो जनता की सुविधाओं के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन इनके क्रियान्वयन की राह कितनी कठिन है, यह बुजुर्गों से ज्यादा कौन समझ सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सिस्टम में बैठे कुछ अफसरों की नाकामी से 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके गरीब बुजुर्गों का …
बरेली,अमृत विचार। सरकारी योजनाएं यूं तो जनता की सुविधाओं के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन इनके क्रियान्वयन की राह कितनी कठिन है, यह बुजुर्गों से ज्यादा कौन समझ सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सिस्टम में बैठे कुछ अफसरों की नाकामी से 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके गरीब बुजुर्गों का सहारा वृद्धावस्था पेंशन उनका साथ छोड़ चुकी है।
बुजुर्ग लाठी लिए बैंक व विभाग के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन इनकी न तो बैंक सुन रहे हैं, न ही समाज कल्याण विभाग। खाते में पेंशन आई या नहीं, विभाग ने भेजी या नहीं कोई बताता तक नहीं है।
मंगलवार को विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग में संबंधित लिपिक से पेंशन की जानकारी लेने पहुंचे कई बुजुर्गों ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत हर माह सरकार 500 रुपए देती है। इस रकम से बहुत सारी जरूरतें पूरी हो जाती हैं, लेकिन हालत यह है कि किसी के खाते में सालभर से पेंशन नहीं आई तो किसी के खाते में छह माह से।
मंगलवार को पेंशन की आस में दूरदराज से पहुंचे बुजुर्गों ने कहा कि पेंशन के अलावा उनका कोई जरिया नहीं है। कमाते-खाते लड़के और बहू भी कहते हैं कि तुम्हें तो पेंशन मिल रही है, उतनी काफी है और खर्च भी क्या है इसलिए उन्हें बुढ़ापे में दवा-इत्यादि के खर्चों के लिए पेंशन भी ही निर्भर रहना होता है, वह भी साल-छह महीने न मिलती है तो बड़ी मुश्किल हो जाती है। वहीं, समाज कल्याण विभाग के अफसरों का कहना है कि पेंशन का बजट शासन स्तर से जारी होता है। वह सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचता है।
“वृद्धावस्था पेंशन के लिए करीब छह महीने पहले फार्म भरा था। ब्लॉक कार्यालय गए तो वहां से कर्मचारियों ने यह कहकर टरका दिया कि समस्या का समाधान विकास भवन स्थित समाज कल्याण विभाग से होगा। यहां दूसरी बार बेटी के साथ आया हूं, लेकिन इस बार भी कर्मचारियों ने बहानेबाजी कर टरका दिया।” -रामचंद्र, फतेहगंज पश्चिमी
“जून 2018 में वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत हो चुकी है, दो साल से ब्लॉक से लेकर मुख्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं। बुजुर्ग उदयपाल के मुताबिक सरकारी मशीनरी का कार्य बेहद लचर है। बैंक और समाज कल्याण विभाग के फेर में आज भी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। कर्मचारी चक्कर पर चक्कर कटवा रहे हैं।” -उदयपाल, आसपुर
