बरेली: रोजगार की योजनाएं भी झूठी आस बंधाएं... क्या करें महिलाएं

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। लिंगानुपात में बरेली को उत्तर प्रदेश में पहला स्थान मिला तो अफसरों ने श्रेय लेने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी लेकिन मनरेगा में लक्ष्य के मुताबिक एक-तिहाई महिलाओं को भी रोजगार न दे की असफलता सामने आई तो कन्नी काट गए। इस योजना में 3,11,052 (करीब 3.11 लाख) जॉब कार्डधारक महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य था, लेकिन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का ढिंढोरा पीटने वाला सिस्टम 97486 महिलाओं को ही रोजगार दे पाया। 70 प्रतिशत महिलाएं रोजगार गारंटी से वंचित रह गईं।

सरकारी योजनाओं की दुर्दशा की हद यह है कि काम पाने के लिए मनरेगा में जॉब कार्ड बनवाने वाली ये महिलाएं ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर काट रही हैं, लेकिन फिर भी उनकी कोई नहीं सुन रहा है। डीसी मनरेगा गंगाराम वर्मा के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा मनरेगा मजदूरों को रोजगार देने के लिए लगातार खंड विकास अधिकारी और मनरेगा कर्मियों का नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके बावजूद वे इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसका असर मनरेगा मजदूरों के साथ कामों पर भी पड़ रहा है।

डीसी मनरेगा ने बताया कि लगातार चेतावनी के बाद भी मजूदरों को काम दिए जाने को लेकर मनरेगा कर्मियों के गंभीर न होने के पीछे भ्रष्टाचार वजह हो सकती है। ब्लॉकों में कहीं अफसरों की मिलीभगत से ग्राम प्रधान और सचिव जेसीबी से खुदाई करा रहे हैं तो कहीं हाथ में फावड़ा थामे श्रमिकों का फोटो खींचकर गोलमाल किया जा रहा है। समय से भुगतान न किए जाने की शिकायतें भी तमाम हैं। इस गोलमाल में कंप्यूटर ऑपरेटर, तकनीकी सहायक और एपीओ स्पष्ट तौर पर शामिल हैं। अब इन लोगों की सेवाएं खत्म की जाएंगी, साथ ही खंड विकास अधिकारियों ने रवैया न बदला तो उनका भी वेतन रोका जाएगा।

24 दिन में कैसे खर्च होंगे 45 करोड़
अफसरों के मुताबिक मनरेगा में मई के अंत तक 45 करोड़ रुपये खर्च किया जाना है लेकिन मनरेगा के कर्मचारियों की लापरवाह से अब तक सिर्फ पांच करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। वह भी तब जब इसके लिए लगातार बीडीओ से लेकर प्रधान और सचिवों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लक्ष्य पूरा न हुआ तो 90 प्रतिशत मनरेगा कर्मियों को अप्रैल और मई का मानदेय नहीं मिलेगा। इस स्थिति में मजदूरों तो खाली हाथ रहेंगे ही लेकिन मनरेगा कर्मियों का मानदेय भी फंस जाएगा।

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