Kanpur News : हार मानकर मत बैठें क्लेम की लड़ाई लडें, बीमा कंपनी की मनमानी पर लगाम लगाता फोरम
कानपुर में बीमा कंपनी की मनमानी पर फोरम लगाम लगाता है।
कानपुर में बीमा कंपनी की मनमानी पर फोरम लगाम लगाता है। उपभोक्ता फोरम में बीमा कंपनियों के खिलाफ 1320 केस दर्ज है। हजारों उपभोक्ताओं को फोरम राहत दिला चुका है।
कानपुर, [कुशाग्र पांडेय]। सैकड़ों उपभोक्ता है, जो बीमा का पैसा लेने के लिए कंपनी के दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते है। कंपनी और उनके एजेंट के बीच वह इतना उलझ जाते है कि वह जानबूझकर बीमा का पैसा ही भूल जाते है। कुछ लोग बीमा न मिलने से अपनी जिंदगी कमाई पूरी पूंजी ही गवां देते है। वहीं, कुछ जागरूक उपभोक्ता होते है तो उपभोक्ता फोरम के माध्यम से मुकदमा लड़कर अपना पूरा पैसा हासिल कर लेते है। अब तक फोरम के माध्यम से हजारों उपभोक्ताओं को उनका पैसा मिल चुका है।
केस-1
काकादेव निवासी कंचन गुप्ता के पति ने एलआईसी से हेल्थ इंश्योरेंस कराया था। एलआईसी के एजेंट ने उनके पॉलिसी के 55 हजार रुपये एक मुश्त जमा भी करवा लिया था। करीब तीन महीने बाद कंचन के पति के दांत में दर्द हुआ। उन्होंने चेकअप कराया तो पता चला कि कैंसर जैसी घातक बीमारी हो गई है। उन्होंने इलाज के लिए क्लेम किया तो एलआईसी ने यह कहकर क्लेम देने से मना कर दिया कि उन्होंने बीमारी छुपाकर पॉलिसी कराई है। इससे परेशान होकर कंचन उपभोक्ता फोरम में मुकदमा दायर किया। इस बीच कंचन के पति की मौत हो गई। उनके इलाज में सात लाख रुपये भी खर्च हो गए थे। कंचन के अधिवक्ता मनीष मिश्रा ने एलआईसी को नोटिस भेजकर मुकदमा लड़ा। उनकी दलीलों से संतुष्ट होकर फोरम हो गया और फोरम के आदेश पर एलआईसी को पीड़िता को सात लाख रुपये का क्लेम देना पड़ा।
केस-2
परेड निवासी राधेश्याम ने माई कार शोरूम से मारुति कार खरीदी थी। उस दिन कोई बवाल होने की वजह से शोरूम से राधेश्याम को कार तो दे दी गई, लेकिन बीमा के पेपेर नहीं दिए गए। जब राधेश्याम ने बीमा के पेपर मांगे तो यह कहकर उनको घर भेज दिया गया। कार का बीमा हो गया। आपको बीमा के पेपर घर भेज दिए जाएंगे। करीब आठवें दिन राधेश्याम की कार बिल्हौर में दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो जाती है। उन्होंने क्लेम मांगा तो बीमा कंपनी ने यह कहकर क्लेम देने से इंकार कर दिया कि कार का बीमा नहीं है। राधेश्याम ने उपभोक्ता फोरम में केस दाखिल किया। जिसमें उनके वकील ने दलील दी कि कार तभी शोरूम के बाहर जब उसका बीमा हो जाता है। उनकी दलील को संज्ञान में लेते हुए फोरम ने बीमा कंपनी को क्लेम का रुपया देने का आदेश दिया।
बीमा कंपनी के खिलाफ चल रहे है 1320 मुकदमे
उपभोक्ता फोरम में इस समय अलग अलग बीमा कंपनियों के खिलाफ 1320 मुकदमे चल रहे है। इसमें ज्यादातर मुकदमे क्लेम से संबंधित है। फोरम से अब तक हजारों केस का निस्तारण हुआ है। इसमें ज्यादातर केसों को निस्तारण उपभोक्ता के पक्ष में ही हुआ है। इसकी पुष्टि फोरम के आंकड़ों से की जा सकती है। फोरम से जुड़े मामले के एक्सपर्ट अधिवक्ता मनीष मिश्रा के मुताबिक बीमा कंपनी एजेंट को टारगेट देती है। एजेंट टारगेट पूरा करने के चक्कर में उपभोक्ताओं को पूरे नियम और शर्तों को नहीं बताता है। इस वजह से उपभोक्ताओं के साथ धोखा हो जाता है। दूसरा कारण उपभोक्ताओं में जागरूकता की कमी है। उपभोक्ता कोई भी बीमा कराने के समय उसकी नियम और शर्तों को नहीं पढ़ता है और वह एजेंट पर ही भरोसा कर बीमा करवा लेता है। यही वजह से उनको बाद में धोखे का सामना करना पड़ता है।
फोरम में कैसे दाखिल करते है मुकदमा
अगर आप कोई भी सामान खरीदते है या बीमा करवाते है तो आपको सबसे पहले उसको बिल जरूर लेना चाहिए। बिल के माध्यम से आप साबित कर सकते है कि आपने किस दुकान या कंपनी से सामान लिया है। आपको जीएसटी वाला ही बिल लेना चाहिए। यह बिल ही मान्य है। अगर आपका खरीदा हुआ सामान खराब है या कंपनी आपको सुविधा नहीं उपलब्ध करा रही है तो आपको संबंधित कंपनी के अधिकारी को लीगल नोटिस भेजना पड़ेगा। कंपनी से आपको नोटिस का जवाब मिलेगा। अगर उस जवाब से आप संतुष्ट नहीं है। तब आप शपथपत्र और एक रसीदी टिकट के साथ एक प्रार्थना पत्र फोरम दाखिल कर सकते है।
अगर जीते तो मुकदमे का खर्च भी वापस मिलता है
उपभोक्ताओं के साथ बेईमानी रोकने के लिए फोरम बनाया गया है। फोरम में आप खुद भी मुकदमा लड़ सकते है। इसके अलावा अधिवक्ता के माध्यम से भी मुकदमा लड़ सकते है। फोरम उपभोक्ता के तथ्यों से संतुष्ट होकर उसके पक्ष में फैसला सुनाता है तो फोरम क्लेम की गई रकम के साथ उपभोक्ता के मुकदमा लड़ने में हुए खर्च को मय व्याज के साथ वापस दिलाता है। यह रकम संबंधित कंपनी को चुकानी पड़ती है, जिसके खिलाफ उपभोक्ता मुकदमा दर्ज करता है।
बीमा कराते समय क्या क्या सावधानी बरतनी चाहिए
- बीमा कराते समय दस्तावेजों को अच्छे पढ़ना चाहिए
- बीमा कई तरह के होते है तो अपने अनुरूप शर्तों वाला बीमा ही कराना चाहिए
- बीमा के कवर और बजट को तय कर ही पॉलिसी लेनी चाहिए
- कैशलेस सुविधा वाला बीमा ही लेना चाहिए
- किन परिस्थितियों में क्लेम मिलेगा, बीमा कराते समय ही जानकारी लेनी चाहिए
- बीमा करने वाले एजेंट का नाम और नंबर जरूर रखे अपने पास
