Kanpur: अंधाधुंध जल दोहन से सूख गई धरती की कोख, ग्राउंड वाटर इस्टीमेशन कमेटी की रिपोर्ट में आए चौंकाने वाले ये तथ्य

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कनपुरिये धरती की कोख से 90 प्रतिशत पानी निकाल ले रहे।

कनपुरिये धरती की कोख से 90 प्रतिशत पानी निकाल ले रहे। ग्राउंड वाटर इस्टीमेशन कमेटी की आई रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इसमें चौबेपुर व शहर की हालत खराब।

कानपुर, [अभिनव मिश्र]। केंद्र सरकार की ग्राउंड वाटर इस्टीमेशन कमेटी की रिपोर्ट में चौकाने वाले तथ्य सामने आए है। शहर के साथ चौबेपुर क्षेत्र के लोग 90 प्रतिशत तक भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं। जो कि आने वाले समय में शहरवासियों के लिए घातक साबित हो सकता है। रिपोर्ट आने के बाद भूगर्भ जल विभाग ने शहर व चौबेपुर ब्लाक को क्रिटिकल श्रेणी में रखा है। भूगर्भ दोहन का प्रतिशत कम करने के लिए विभाग लोगों को जागरुक करने की तैयारी कर रहा है।

शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाके भी भूगर्भ जल दोहन करने में अव्वल स्थान प्राप्त कर रहे है। ग्रामीण क्षेत्रों में नहरों व तालाबों से  सिचाई की अपेक्षा अधिकांश जगहों पर ट़्यूबबेलों को प्रयोग किया जा रहा है। वहीं शहरी क्षेत्रों में हर दूसरे घर में लगे सबमर्सिबल पंप धरती की कोख को सूखा कर रहे है। केंद्र सरकार की ग्राउंड वाटर इस्टीमेशन कमेटी व भूगर्भ जल विभाग की 2018 से 2022 तक की रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम परिसीमन के क्षेत्र और चौबेपुर ब्लाक भूगर्भ जल दोहन में सबसे आगे है।

शहरवासी 90 प्रतिशत भूगर्भ जल का दोहन कर रहे है, जिसके कारण आने वाले समय में शहरवासियों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। विभाग की जारी रिपोर्ट के अनुसार शहर के गंगा किनारे स्थित मोहल्लों समेंत कई इलाकों का जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

भूगर्भ जल विभाग 16 से 22 जुलाई तक भूजल सप्ताह मनाने जा रहा है, जिसमें शहर के कई क्षेत्रों में विभाग कैंप लगाकर कम से कम भूजल दोहन के लिए लोगों को जागरूक करेगा। इसके साथ ही लोगों को वर्षा का जल संचयन करने के बारे में भी जानकारी देगा, जिससे जलस्तर को सुधारा जा सके। इसके साथ ही भूगर्भ जल विभाग ने प्री मानसून के आंकड़े लेने शुरु कर दिए है। 

भूगर्भ जल दोहन की दर 

भूगर्भ जल विभाग के अनुसार शहर को सुरक्षित, सेमी क्रिटिकल व क्रिटकल श्रेणी में बांटा गया है। 

- 70 प्रतिशत भूगर्भ जल दोहन करने वाले इलाकों को सुरक्षित
- 70 से 90 प्रतिशत भूगर्भ जल दोहन करने वाले इलाकों को सेमी क्रिटिकल
- 90 प्रतिशत तक भूगर्भ जल दोहन करने वाले इलाकों को क्रिटिकल श्रेणी में रखा गया है। 

सुरक्षित श्रेणी में आने वाले इलाके

1- ककवन
2- कल्याणपुर
3- भीतरगांव

सेमी क्रिटिकल श्रेणी में आने वाले क्षेत्र

1- बिधनू
2- बिल्हौर
3- घाटमपुर
4- पतारा
5- सरसौल
6- शिवराजपुर

कैसे करे जल संचयन

भूगर्भ जल के घटते जल स्तर को बचाने के लिए वर्षा का जल संचयन करना अति महत्वपूर्ण है। मानसून के दौरान शहरी क्षेत्रों में बारिश का अधिकांश जल व्यय हो जाता है। वर्षा का जल संचयन आसानी से घरों में किया जा सकता है। 100 वर्ग तक की छत में रेन वाटर हार्वेसटिंग सिस्टम के माध्यम से, छोटी छतों में सोख पिट व ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून आने से पूर्व तालाबों की सफाई कर जल का संचयन करने से जल स्तर में सुधार लाया जा सकता है।

अनावश्यक रुप से न करे जल की बर्बादी

ग्रामीण क्षेत्रों में पहले पशुओं को नहलाने व फसलों की सिंचाई के लिए नहर व तालाबों के जल का प्रयोग किया जाता था, लेकिन आज ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा जल का दोहन किया जा रहा है। नहर व तालाब सूखे पड़े हुए है। वही शहरी क्षेत्रों में हर मोहल्ले में गाड़ियों की धुलाई में रोजाना लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। शहरी क्षेत्र के अधिकांश इलाकों में कंक्रीट होने के कारण वर्षा का जल संचयित नहीं हो पाता। लोगों को वर्षा के जल संचयन करना होगा वरना आने वाले समय में भयावह स्थितियां होंगी। जल संचयन की जानकारी के लिए लोग विभाग से संपर्क कर सकते हैं।- अविरल कुमार सिंह हाइड्रोलाजिस्ट, भूगर्भ जल विभाग

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