कलकत्ता से आए Kanpur और फैलाया UP में घड़ों का कारोबार, दिल को सुकून देकर प्यास बुझा रहे रंग बिरंगे घड़े

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर में दिल को सुकून देकर प्यास बुझा रहे रंग बिरंगे घड़े।

कानपुर में दिल को सुकून देकर रंग बिरंगे घड़े प्यास बुझा रहे। गर्मी बढ़ने के साथ बढ़ने लगी मिट्टी के घड़े, बोतल, कैंपर की मांग।

कानपुर, [विकास कुमार]। दिल को सुकून देकर उत्तर प्रदेश और कलकत्ता की मिट्टी से बने घडे़ कानपुर के साथ ही आसपास के जिले वासियों की प्यास बुझा रहे है। लोग मिट्टी के घड़े व बोतल का पानी पीकर गर्मी में तरोताजा हो रहे है। जबकि गुजरात से आए घड़े पानी ठंडा नहीं कराने से लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रहे। 

गर्मी में इस बार प्यास बुझाने के लिए लोग घड़ों का सहारा ले रहे है। यह देसी फ्रिज गर्मी के साथ ही कई तरह के रोगों से भी बचाव करती है। साथ ही इसमें देश की मिट़्टी की सुगंध भी मिलती है, जो दिल को सुकून देती है। गोलचौराहा के पास स्थित मिट्टी के बर्तनों की दुकान लगाए कुम्हार मनोज कुमार दास ने बताया कि मई माह की गर्मी में घड़े व कैंपर की मांग बढ़ी है। निर्माण के लिए इलाहाबाद से काली मिट़्टी व बालू लाते है।

इसके साथ ही कलकत्ता के सिलिगुड़ी से 1800 घड़े और गुजरात से करीब दो हजार घड़े मांगाए है। मिट्टी से बनी पानी की बोतल व कैंपर लोगों को काफी पसंद आ रहे है। घड़ों को बार-बार बंद करने व खोलने की झंझट खत्म करने के लिए उसमें टोटी लगी है। पानी की बोतल से कोई भी व्यक्ति कार्यालय या बाइक में रखकर अपनी प्यास बुझा सकता है।

मनोज का कहना है कि घडे व बोतले कानपुर के साथ ही झांसी, लखनऊ, कन्नौज, बांदा, उरई, हमीरपुर, इटावा, हरदोई आदि क्षेत्रों में जाते है। करीब दस हजार से अधिक बोतलें इन जिलों में भेजी जा चुकी है। कलकत्ता व उत्तर प्रदेश की मिट्टी से बने घड़े ही लोगों को काफी पसंद आ रहे है। जबकि गुजरात के घड़े पानी ठंडा नहीं कर पा रहे है। क्योंकि वह लाल मिट्टी से बने है। 

23 साल पहले कलकत्ता से आए थे कानपुर 

कुम्हार मनोज रोजगार की आस में सन् 1997 में कानपुर आए थे। कोई काम न मिलने की वजह से उन्होंने यहां पर अपना पुस्तैनी काम घडे बनाना शुरू किया। उसके बाद धीरे-धीरे इनका यह व्यापार बढ़ता गया। मनोज के घड़े कानपुर के साथ ही दस से अधिक जिलों में अब जाते है। बताया कि दादा युधिष्ठिर और पिता मौरंद्र दास से घड़े व मिट्टी के पात्र बनाने के तौर तरीके सीखें है। इनकी बिक्री होने पर ही घर खर्च चलता है। कुम्हारों के लिए गर्मी बेहद खास होती है। 

   पात्र                      रेट
बिना टोटी का घड़ा  50 से 150 रुपये    
टोटी का घड़ा         130 से 200 रुपये 
मिट्टी की बोतल       160 से 200 रुपये  
मिट्टी का कैंपर        200 से 400 रुपये 
मिट्टी का जग         250 रुपये

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