बरेली: सालभर में पर्यावरण शुद्ध करने का दावा, 50 बिंदुओं पर कार्ययोजना तैयार
बरेली,अमृत विचार। बरेली में साल दर साल प्रदूषण बढ़ रहा है। डेढ़ दशक में प्रदूषण में सबसे बड़ी वृद्धि होने के बाद पर्यावरण को शुद्ध कराने के लिए एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। एनजीटी के निर्देश पर प्रशासन ने सालभर में पर्यावरण को शुद्ध करने का दावा करते हुए 50 से अधिक बिंदुओं पर कार्ययोजना …
बरेली,अमृत विचार। बरेली में साल दर साल प्रदूषण बढ़ रहा है। डेढ़ दशक में प्रदूषण में सबसे बड़ी वृद्धि होने के बाद पर्यावरण को शुद्ध कराने के लिए एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। एनजीटी के निर्देश पर प्रशासन ने सालभर में पर्यावरण को शुद्ध करने का दावा करते हुए 50 से अधिक बिंदुओं पर कार्ययोजना तैयार कराई है। जिसमें दीर्घकालिक कार्ययोजना और शार्ट टर्म एक्शन प्लान तैयार किए गए हैं।
इसमें 15 से 360 दिन में उन सभी कामों को पूरा करने का लक्ष्य रखा है जो कार्य लंबित पड़े हैं। उसमें कंस्ट्रक्शन के बड़े प्रोजेक्ट, नदियों का पानी शुद्ध करने, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के साथ तालाब, पोखर को पुनर्जीवित करने जैसे तमाम कार्य हैं। प्रशासन ने 10 पेज की कार्ययोजना बनाकर स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जरिए शासन को भिजवा दी है।
यह कार्ययोजना एनजीटी नई दिल्ली द्वारा लेफ्टिनेंट कर्नल सर्वदमन सिंह ओबराय प्रति यूनियन आफ इंडियन व अन्य में पारित हुए आदेश के अनुपालन में तैयार की गई है। आदेश में जिला स्तर पर वाटर बॉडीज के पुनर्जीवन करने के लिए कार्ययोजना बनाने के आदेश दिए गए थे। इसी आदेश के उपलक्ष्य में कार्ययोजना बनाने के लिए 27 जुलाई को सचिव पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन की अध्यक्षता में लखनऊ में एक कार्यशाला आयोजित हुई। जिसमें जिलाधिकारियों और वनाधिकारियों को कार्ययोजना बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था।
कार्ययोजना बनाने के लिए जिलाधिकारी नितीश कुमार ने जिला पर्यावरण समिति की जून में बैठक बुलाई। समिति में पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कार्ययोजना के 50 से अधिक बिंदुओं पर फोकस करते हुए चर्चा की गई। इसके बाद कार्ययोजना तैयार की गई। जिसमें 15 से 360 दिनों में छोटे-बड़े कार्य कराकर वाटर बॉडीज को पुनर्जीवन करने के साथ पर्यावरण को शुद्ध करने का दावा किया गया है।
बरेली में वायु गुणवत्ता सूचकांक सबसे ज्यादा खराब
शासन को भेजी गई कार्ययोजना में प्रदूषण के जो आंकड़ों दर्शाए गए हैं, उनके अनुसार प्रदूषण का स्तर साल दर साल बढ़ रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक सबसे खराब हो रहा है। यदि प्रदूषण को कम करने के लिए कदम नहीं उठाए गए तो इससे गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हालांकि सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन डाई ऑक्साइडû का स्तर निर्धारित मानकों के भीतर है। अन्य प्रदूषकों का स्तर पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है।
बरेली में पिछले डेढ़ दशक के दौरान खतरनाक वृद्धि देखी गई है। 2001 से 2011 के दौरान शहर में लगभग 27.66 प्रतिशत जनसंख्या और वाहनों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है। बरेली में दो स्थानों पर की गई निगरानी के आधार पर वर्तमान समीक्षा ने शहर में मुख्य प्रदूषक के रूप में कणों की पहचान की है। उच्च यातायात घनत्व और असामान्य मौसम संबंधी कारकों ने सर्दियों में बरेली के परिवेश वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
वायु प्रदूषण के ये हैं मुख्य स्रोत
बरेली शहर में वायु प्रदूषण के मुख्य स्रोत वाहन, सड़क की धूल, निर्माण और विध्वंस गतिविधियां, उद्योग, कचरा जलाना और कृषि अपशिष्ट जलाना आदि हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बरेली शहर की परिवेशी वायु गुणवत्ता के लिए दो स्थानों पर स्वयं निगरानी की है। इसमें आईवीआरआई इज्जत नगर और प्रभा टाकीज के पास पीएम10- एसओ 2 और एनओ 2 मापदंडों को मापा गया। वर्ष 2013-2018 के दौरान परिवेशी वायु गुणवत्ता का वार्षिक औसत डेटा विशेष रूप से पीएम10 (पार्टिकुलेट मैटर) का आकार 10 माइक्रोन से कम देखा गया।
“कार्ययोजना शासन को भेजी जा चुकी है। उसमें जो बिंदु शामिल किए गए हैं, संबंधित विभागों के जिम्मेदारों को पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। अभी कोविड काल चल रहा है। इसमें बिंदुवार काम पूरा कराना भी चुनौती है। समय आगे भी बढ़ाया जा सकता है।”
-रोहित सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
