बरेली: 360 दिन काम किया तो प्रदूषण मुक्त हो जाएगा शहर
बरेली,अमृत विचार। शहर को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए जो कार्ययोजना बनाई गई है। यदि जिम्मेदारों ने अमल कर लिया तो शहर से प्रदूषण गायब हो जाएगा लेकिन कार्ययोजना के बिंदुओं को देखने से ऐसा लग नहीं रहा है। इसमें सबसे ज्यादा घातक डी ग्रेड वायु गुणवत्ता सूचकांक माना गया है। प्रशासन की कार्ययोजना के …
बरेली,अमृत विचार। शहर को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए जो कार्ययोजना बनाई गई है। यदि जिम्मेदारों ने अमल कर लिया तो शहर से प्रदूषण गायब हो जाएगा लेकिन कार्ययोजना के बिंदुओं को देखने से ऐसा लग नहीं रहा है। इसमें सबसे ज्यादा घातक डी ग्रेड वायु गुणवत्ता सूचकांक माना गया है।
प्रशासन की कार्ययोजना के अनुसार डी ग्रेड वायु गुणवत्ता सूचकांक का सबसे ज्यादा असर इमारतों, सामग्रियों, मानव स्वास्थ्य, पौधों, ऐतिहासिक स्मारकों और सामग्री की सतह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे वायु प्रदूषकों के कारण सड़ जाते हैं। इसलिए बरेली शहर के वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एक दीर्घकालिक और अल्पकालिक ग्रेडेड एक्शन प्लान तैयार किया गया है। जिसमें नगर निगम को यदि एयर क्वालिटी इंडेक्स गंभीर या उससे अधिक पाया जाता है तो सुरक्षा के लिए मास्क की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदूषण कम करने के लिए ये काम कराए जाएंगे
– 360 दिनों में जिला आपूर्ति अधिकारी को तेल कंपनियों को ईंधन की मिलावट की जांच और निगरानी करने के लिए कार्य योजना तैयार करने और उसका कार्यान्वित करने की जिम्मेदारी दी है।
– 90 दिनों में नगर निगम को शहर की सड़कों के चौड़ीकरण के लिए योजना तैयार करने, क्रियान्वयन कराने और सड़क के विकास के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार करने के निर्देश दिए हैं।
– शहर में चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना सहित बैटरी संचालित वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 120 दिन का लक्ष्य रखा गया है। इसमें परिवहन विभाग/ नगर निगम और बरेली विकास प्राधिकरण को जिम्मेदारी दी गई है।
– 180 दिनों में परिवहन विभाग के वाहनों की ओवरलोडिंग को रोकने के लिए शहरों और कस्बों और राज्यों की सीमाओं पर गति पुलों में वजन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
– ट्रैफिक पुलिस को 180 दिन में इंटेलीजेंट ट्रैफिक सिस्टम का परिचय देते हुए रिमोट कंट्रोल आधारित सिस्टम की स्थापना करने को कहा है।
दीर्घकालिक कार्य योजना
– मास्टर प्लान 2021 के तहत नगर निगम, बीडीए और वन विभाग को 360 दिन में शहर में कम से कम 33 प्रतिशत वन कवर क्षेत्र को बनाने का लक्ष्य दिया गया है।
– सभी नहरों और नाले की साइड की सड़कों को ईंट से ढकने और आसपास उचित पौधारोपण कराने के लिए सिंचाई विभाग व वन विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। ये काम पूरा कराने के लिए 360 दिनों का लक्ष्य रखा गया है।
अल्पकालिक कार्ययोजना
– ट्रैफिक गलियारों के साथ हरे बफर्स के निर्माण के लिए योजना तैयार करें। पौधों की विशिष्ट प्रकार की प्रजातियों का रोपण जो प्रदूषण नियंत्रण में सहायक होते हैं। इसका लक्ष्य 90 दिन का रखा है। वन विभाग, नगर निगम और बीडीए को जिम्मेदारी दी गई है।
– यातायात के मुक्त प्रवाह के लिए गड्ढा मुक्त सड़कों को बनाने के लिए 90 दिन का लक्ष्य रखा है। बाद में नियमित गतिविधि जारी रखने को भी कहा है। नगर निगम और बीडीए को जिम्मेदारी दी गई है।
– नगर निगम को 90 दिनों के भीतर प्रमुख यातायात चौराहों पर पानी के फव्वारे लगवाने को निर्देश दिए हैं।
– वन विभाग को 90 दिनों के भीतर खुले क्षेत्रों, उद्यानों, सामुदायिक स्थानों, स्कूलों और आवास समितियों को हरा भरा करने को कहा है।
– प्रदूषण नियंत्रण के उपाय में एसटीपी के उपचारित अपशिष्टों का उपयोग जैसे कि पौधों को पानी लगाना, धूल दबाने के उद्देश्य से छिड़काव कराने के लिए नगर निगम को 90 दिन दिए हैं।
– सड़क से धूल के नियंत्रण के लिए दीवार से दीवार फुटपाथ। बीच में घास उगाने की क्षमता रखने वाले फुटपाथ फुटपाथ और टाइलें डिजाइन कराने के लिए नगर निगम को 180 दिन का समय दिया है।
फसल अवशेष, कचरा, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट जल से उत्सर्जन का नियंत्रण
– फसल अवशेष, कचरा, पत्ते, आदि के खुले में जलाने के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कराने के लिए नगर निगम को 90 दिन का समय दिया है।
– नगरपालिका के ठोस कचरे को जलाने की नियमित जांच और नियंत्रण और नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट और जैव द्रव्यमान में आग पर नियंत्रण के लिए अग्निशामक यंत्र का उपयोग करने के लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई है।
– बागवानी अपशिष्ट ( जैव-द्रव्यमान) का उचित संग्रह और खाद, बागवानी दृष्टिकोण के बाद इसका निपटारा करने के लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई।
– कृषि अपशिष्ट और फसल अवशेषों को जलाने पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने और इसके कार्यान्वयन के लिए कृषि विभाग और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ को 180 दिन का समय दिया गया।
– एजेंसी द्वारा अलग-अलग कचरे का डोर-टू-डोर कलेक्शन और फिर जमीन पर बिना डंपिंग के सीधे प्लांट में इसका निपटारा कराने के लिए नगर निगम को 90 दिन दिए हैं।
– बायोडिग्रेडेबल कचरे के प्रबंधन के लिए पार्कों, आवासीय सोसाइटियों आदि में खाद के गड्ढों की स्थापना कराने के लिए नगर निगम व बीडीए को 90 दिन दिए गए हैं।
– नगर निगम और बीडीए को जिम्मेदारी दी गई है कि दो वर्ष से अधिक समय तक किसी भी भूखंड को खुला नहीं छोड़ने और खाली पड़े भूखंडों पर पेड़ लगाना अनिवार्य है। 90 दिन में ये कार्य पूरा करना है।
उद्योगों पर भी फोकस किया गया
– ईंट भट्टों की पहचान और उनकी नियमित निगरानी (जिसमें निर्दिष्ट ईंधन का उपयोग और अनाधिकृत इकाइयों को बंद कराने को 60 दिन, प्राकृतिक मसौदा ईंट भट्ठों का रूपांतरण प्रेरित मसौदा को 120 दिन, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी के लिए 60 दिन, अनुपालन न करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करनी है। उद्योगों से पर्यावरण प्रदूषण के नियंत्रण के लिए सीटीओ व सीटीई में लगाई गई शर्तों के अनुपालन के लिए बैंक गारंटी लेने, किसी भी उल्लंघन के मामले में बैंक गारंटी जब्त की जाएगी। शर्तों के सत्यापन के लिए थर्ड पार्टी इंस्टीट्यूशंस क्वालिटी कंट्रोल एजेंसियों द्वारा कराना है। इसके लिए 60 दिन तय किए गए हैं। 60 दिन में सकल प्रदूषणकारी उद्योगों में वेब कैम और ओसीएमएस की स्थापना करने का लक्ष्य रखा गया है।
निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से वायु प्रदूषण का नियंत्रण
– निर्माण और विध्वंस नियम 2016 को लागू कराने, डिफॉल्ट इकाइयों पर जुर्माना लगाने के लिए बरेली विकास प्राधिकरण को 15 दिन दिए हैं।
-पानी के छिड़काव, पर्दे, बाधाओं और धूल दमन इकाइयों के माध्यम से सामग्री से निपटने, संदेश और स्क्रीनिंग संचालन से भगोड़ा उत्सर्जन के लिए नियंत्रण के उपाय करने की जिम्मेदारी बरेली विकास प्राधिकरण को दी है।
– बरेली शहर के विकास के लिए मास्टर प्लान 2021 तैयार करने के दौरान पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करने की जिम्मेदारी बरेली विकास प्राधिकरण को दी है।
– बिल्डर्स को आवासीय कॉलोनियों में ग्रीन बेल्ट के लिए 33 फीसदी क्षेत्र छोड़ चाहिए। एक उचित समय सीमा के भीतर शहरी विकास/विकास प्राधिकरण व आवास कंपनियां इसको देखेंगी।
– सभी निर्माण क्षेत्रों को कणों के फैलाव से बचने के लिए कवर किया जाना चाहिए। इसको कराने के लिए नगर निगम व बीडीए को 30 दिन दिए हैं।
वायु प्रदूषण को ऐसे नियंत्रित करने की योजना
– नगर निगम को एक रेंडरिंग प्लांट बनाने के निर्देश दिए हैं। रेंडरिंग प्लांट एक प्रोसेसिंग ऑपरेशन है। जिसमें मृत जानवरों को मानव भोजन से लेकर बायोडीजल के उत्पादों में पुनर्नवीनीकरण किया जाता है। इसके लिए 360 दिन दिए गए हैं।
– वायु प्रदूषण के शमन के लिए पौधारोपण, प्रदूषण स्रोतों के खुले स्थान पर आधारित और विंडरोज डेटा बनवाने के लिए वन विभाग व बीडीए को निर्देश दिए हैं। इस काम के क्रियान्वयन के लिए 360 दिन निर्धारित किए हैं।
– घरेलू और वाणिज्यिक खाना पकाने के लिए एलपीजी व पीएनजी के कवरेज को 100 फीसदी बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। जिला आपूर्ति अधिकारी को संबंधित अधिकारियों के साथ 30 दिन में प्लानिंग बनाने के निर्देश दिए हैं।
