बरेली: सहकारी समितियों से सपा-बसपा का किला ध्वस्त
विश्वदीपक त्रिपाठी, बरेली। सहकारी समितियों के चुनाव के बाद सपा और प्रसपा के शिवपाल सिंह यादव का आधिपत्य समाप्त होने की कगार पर है। केन्द्र व प्रदेश के सियासी किले पर कमल खिलाने के बाद भाजपा अब सपा व बसपा के ग्रामीण किले को ध्वस्त करने में कामयाब होती नजर आ रही है। वैसे तो …
विश्वदीपक त्रिपाठी, बरेली। सहकारी समितियों के चुनाव के बाद सपा और प्रसपा के शिवपाल सिंह यादव का आधिपत्य समाप्त होने की कगार पर है। केन्द्र व प्रदेश के सियासी किले पर कमल खिलाने के बाद भाजपा अब सपा व बसपा के ग्रामीण किले को ध्वस्त करने में कामयाब होती नजर आ रही है।
वैसे तो करीब 25 वर्षों से भाजपा ने सहकारी समितियों के चुनावों में कभी कोई खास रुचि नहीं ली लेकिन अब पार्टी इन चुनावों के प्रति भी गंभीर हो गई है। पार्टी ने सहकारी समितियों पर काबिज होने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी और काफी हद तक सफल भी हो रही है।
अभी तो ज्यादातर समितियों पर सपा के पदाधिकारियों का कब्जा है। ऐसे में, माना जा रहा है कि सपा ने समितियों में अपना प्रभाव बनाए रखने के लिए कोशिश तो की लेकिन सफल नहीं होती नजर नहीं आ रही है। इसका परिणाम रहा कि सहकारी भूमि विकास बैंक के चुनाव में 10 में 6 निर्वाचन निर्विरोध हो गए। जबकि 4 पर एक से अधिक प्रत्याशी होने के कारण चुनाव होना है। यहां भी भाजपा पूरी ताकत के साथ जुटी हुई है।
अभी तक गन्ना विकास, क्रय विक्रय, मंडी समिति, ग्राम्य विकास सहकारी समितियों पर अभी तक समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी की वर्चस्व रहा है, पर इस बार भाजपा अब इस सियासी तिलिस्म को तोड़ने की ओर अग्रसर दिख रही है। इस दिशा में भाजपा काफी पहले ही गंभीर हो चुकी थी, इसके कारण सहकारिता प्रकोष्ठ का गठन धरातल स्तर पर कार्य करना शुरू कर दिया था।
इसे देखते हुए पार्टी ने सहकारी समितियों में, हथकरघा में अपने सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर फोकस किया। सहकारिता प्रकोष्ठ को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही पशुपालन, दुग्ध विकास समेत अन्य समितियों पर भाजपा की खास नजर है।
अभी कुछ समय पहले जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन पद पर कब्जे के बाद अब उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक (एलडीबी) लिमिटेड के चुनाव में सबसे बड़ी बात तो यह रही कि इसी उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक कई बार भी अध्यक्ष का दायित्व संभाल चुके प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) शिवपाल सिंह यादव की ओर से कोई भी प्रतिनिधि मैदान में नहीं उतारा गया है।
उनके और बेटे आदित्य यादव ने अपने पिता के राजनीतिक कद का फायदा उठा कर सहकारी समितियों में वर्चस्व कायम किया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही सपा, बसपा और शिवपाल की सहकारी समितियों से विदाई होती नजर आ रही है।
