अयोध्या : ग्रामीण क्षेत्रों में 18 के बजाय 15 घंटे, शहर में 22 के स्थान पर 18 घंटे बिजली, नहीं हो रहा रोस्टर का पालन

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, अयोध्या । शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति नहीं हो रही है। शहरी इलाके में 22 घंटे के बजाय 17 से 18 और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 के बजाए 15 घंटे की ही आपूर्ति की जा रही है। जबकि तीन दिनों पहले मुख्यमंत्री की ओर से रोस्टर के अनुसार आपूर्ति के निर्देश दिए गए थे। शहर में तो गांव से बदतर स्थिति है, यहां रोस्टर की बात तो अलग सामान्य रूप से भी आपूर्ति नहीं हो रही है। लोकल फाल्ट और रामपथ निर्माण से शट डाऊन अलग मुसीबत बना हुआ है।

पूराबाजार संवाददाता के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत की सप्लाई बा-मुश्किल 14 से 15 घंटे हो रही है। सबसे खराब दशा विद्युत उपकेन्द्र मसौधा की है। यहां बिजली कब आती है और कब जाती है पता ही नहीं चलता। वहीं उसमें भी नंदीग्राम फीडर पर पड़ने वाले गांव में यदि लाइन खराब हो जाती है तो बनाने में कई दिन बीत जाते हैं। नंदीग्राम फीडर के कल्याणपुर भदरसा निवासी अरविंद सिंह, मनोज निषाद, सतीश निषाद सुनील बताते हैं कि बिजली चली जाती है तो कई घंटे बाद फिर लौट कर आती है। किसी खराबी पर जब पावर हाउस को सूचित किया जाता है तो बनाने में भी कई दिन लगा देते हैं।

विद्युत उपकेंद्र मसौधा के अवर अभियंता राजेश प्रसाद ने बताया कि ऊपर से मिल रही आपूर्ति के अनुसार ही बिजली दी जा रही है। उपकेंद्र पूरा बाजार में भी विद्युत की सप्लाई का बुरा हाल है। रात में भी बिजली कट जाती है। ताहिर पुर बरौली के अर्जुन तिवारी, राम धीरज तिवारी, रामअचल वर्मा, रामजन्म वर्मा, अमरनाथ वर्मा, बताते हैं कि इस भीषण गर्मी दिन तो किसी तरह गुजर जाता है लेकिन रात नहीं। अवर अभियंता हेमंत यादव ने बताया कि रोस्टर के मुताबिक विद्युत की सप्लाई की जा रही है। रोस्टर प्रतिदिन बदलता रहता है।

जर्जर पारेषण लाइन बन रही आपूर्ति में बाधक

सोहावल इलाके में मंगलसी, आरएल, रेलवे, जगनपुर, सुचित्तागंज, गोड़वा सहित रुदौली बीकापुर को जोड़ने वाले विद्युत उपकेंद्र सोहावल की पारेषण लाइन जर्जर होने से आपूर्ति में बाधक बन रही है। शासन से निर्धारित अवधि में आपूर्ति किसी दिन नहींं हो पाती। 22 घंटे की जगह 18 घंटे भी विभाग आपूर्ति पूरा नही कर पाता है। दिन में 2 से 3 घंटे मेंटिनेंस के नाम पर शटडाउन में आपूर्ति ठप रहती है तो सुबह शाम 3-3 घंटे की रोस्टिंग प्रदेश होती आ रही है। जरा सी हवा तेज हुई अथवा बरसात तो उपकेंद्र से आपूर्ति ठप कर दी जाती है। अवर अभियंता ए के सिंह कहते है पूरे क्षेत्र में बिछाई गई आपूर्ति ब्यवस्था की लाइने पचासों साल पुरानी है। नई विद्युतीकरण में भी पुरानी पारेषण लाइनें नही बदली गयी। जब भी इसकी बात आती है संसाधनों की कमी आड़े आ जाती है। फिर भी अधिकतम आपूर्ति 18 से 20 घंटे तक चल रही है।

अमानीगंज में भी जर्जर लाइनें बनी हैं संकट

अमानीगंज सब स्टेशन से विद्युत आपूर्ति में लगातार बाधा बनी रहती है। पुराने एवं जर्जर तार के सहारे अब तक विद्युत आपूर्ति की जा रही है। जिसके कारण हल्की सी भी आंधी आने या तूफान आने पर लाइन फाल्ट हो जाती है और लोगों को इससे भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अमानीगंज विद्युत सब स्टेशन से अमानीगंज, खंडासा, कोटिया व जयराजपुर फीडर संचालित होते हैं। सबसे अधिक दिक्कत जयराजपुर फीडर में आती है। विभाग दावा तो करता है कि कृषि अन्य कार्यों के लिए अलग-अलग लाइन बनाई जाएगी लेकिन उन सबसे इतर पुरानी एवं जर्जर लाइनों के सहारे किसी तरह विद्युत आपूर्ति की जा रही है। 16 से 18 घंटे बमुश्किल विद्युत आपूर्ति हो पा रही है। उसमें भी शाम के समय अघोषित कटौती और ट्रिपिंग से लोगों का हाल बुरा हो जाता है।

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