Menstrual Hygiene Day 2023 : मासिक धर्म अपशिष्ट पर कार्यशाला आयोजित
लखनऊ, अमृत विचार। माहवारी स्वच्छता दिवस 2023 के अवसर पर स्वच्छ भारत मिशन 2.0 उत्तर प्रदेश द्वारा मासिक धर्म अपशिष्ट पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर निदेशक स्थानीय निकाय नेहा शर्मा की अध्यक्षता में इस कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। उन्होंने कहा कि सैनिटरी नैपकिन का निस्तारण करते वक्त बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। इसके लिए हमें घरों में अलग डस्टबिन रखना चाहिए। समाज में हमें सैनिटरी नैपकिन के समुचित निस्तारण के लिए व्यापक जागरूकता लानी होगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारत सरकार के आवास और शहरी मंत्रालय की संयुक्त सचिव रूपा मिश्रा ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा भारत में हर साल देखभाल के लिए करीब 12.3 बिलियन डिस्पोजेबल सैनिटरी नैपकिन हैं, जिनमें से अधिकांश में प्लास्टिक के घटक होते हैं जिन्हें अपघटित होने में 500-800 वर्ष लगते हैं। अब समय आ गया है कि लोग गीला हरा और नीला सूखा कूड़ेदान के अलावा बायोडिग्रेडेबल वेस्ट के लिए अलग कूड़ेदान का प्रयोग करें, और इसको लेकर हमें जागरूक करने का कार्य करना चाहिए।
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कार्यशाला के दौरान डॉ. श्यामला मणि, प्रोफेसर, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने वर्तमान और भविष्य की चुनौतियाँ- सैनिटरी नैपकिन अपशिष्ट भार पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर इन्होंने सेनेटरी वेस्ट को लेकर लोगों को जागरूक किया और बताया कि हमें वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर जागरूक रहना चाहिए, सिंगल यूज डिस्पोजेबल सैनिटरी प्रोडक्ट्स का प्रयोग कम से कम मात्रा में करना चाहिए। रीयूजबल प्रोडक्ट्स को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
वात्सल्य संस्था की डॉ. नीलम सिंह ने निपटान प्रथाएं और इसका पर्यावरणीय प्रभाव, शहरी बनाम शहरी ग्रामीण भारत को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा की मेंटल हेल्थ की अवेयरनेस को लेकर हमें भी काफी कार्य करना है, लोगों को हमें जागरूक करना है कि मेंस्ट्रूअल हाइजीन हमारे लिए कितनी जरूरी है।
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