पीलीभीत: हत्या के खुलासे को लेकर खूब चक्कर लगाए और छूटती गई उम्मीद, जानिए पूरा मामला 

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। हल्द्वानी के ठेकेदार इब्राहिम की हत्या की गुत्थी सुलझाने में पुलिस पूरी तरह से फेल साबित हुई। नौ माह बीत चुके हैं लेकिन साक्ष्य मिलना तो दूर हत्या की विवेचना ही ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। खुलासे के लिए परिवार ने अधिकारियों के खूब चक्कर लगाए। आश्वासन मिलते गए और उम्मीद दम तोड़ती चली गई। नतीजतन अब तो बेटे के गम में पिता भी बीमार हो गए हैं।

घटना 27 सितंबर 2022 की है। उत्तराखंड के हल्द्वानी इलाके के निवासी इब्राहिम मिकरानी की सुनगढ़ी क्षेत्र के नौगवां ओवरब्रिज के नीचे एक बाइक शोरूम के सामने चलती ईको में गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। दिनदहाड़े हुई हत्या पुलिस के लिए चुनौती बन गई।

तत्कालीन एसपी दिनेश कुमार ने घटना के खुलासा को चार टीम गठित की और टीमों ने शुरुआत में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया। सीसीटीवी फुटेज में हत्यारोपी का चेहरा भी कैद मिला। उसकी शिनाख्त के लिए 25 हजार रुपये का इनाम तक घोषित कर दिया गया, लेकिन यह सब पड़ताल चंद दिन तक ही चली। हत्यारे का स्केच तैयार कराकर आसपास  जनपदों की पुलिस को भेजा। 

बरेली मुरादाबाद और उत्तराखंड के कई इलाकों में टीमों में डेरा जमाया। मगर सफलता नहीं मिली। उसके बाद दो नवंबर 2022 को पीड़ित परिवार ने एसपी से मुलाकात कर हत्यारे को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की। परिवार ने धरना प्रदर्शन की चेतावनी तक दी। उसके बाद हत्यारे के बारे में जानकारी देने पर 25 हजार का ईनाम घोषित कर कर्तव्यों से इतिश्री कर ली गई। पुलिस कामयाब नहीं हो सकी और अब थक हारकर परिवार वाले भी शांत बैठ गए हैं। पुलिस भी हत्याकांड को भूल चुकी है। बताते हैं कि पिता की तबीयत भी बेटे के साथ हुई घटना के बाद से बिगड़ती जा रही है।

ऐसे साख बचा रही पुलिस
इस हत्याकांड में सवाल उठने पर पुलिस साख बचाने में हास्यास्पद दावे कर रही है। पुलिस का कहना है कि हत्यारे के चेहरे को पांच माह पहले ही बेनकाब कर लिया गया था। मगर उसकी पहचान नहीं हो सकी है। वरना पुलिस अब तक खुलासा कर गई होती। एक युवक को स्क्रेच की मदद से खोजा भी तो पता चला कि वह बरेली जेल में बंद था। मगर उसके बाद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।

जेल में रहते पुलिस उससे संपर्क नहीं कर सकी। अब यह तर्क दिया जा रहा है कि उसके जमानत पर छूटने की जानकारी पर उसे ट्रेस कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इस तरह की लापरवाही क्यों बरती गई। उधर, परिजन का तो यही कहना है कि हत्याकांड में शुरुआत से ही पुलिस की कार्यशैली संदेहास्पद रही है। पुलिस ने इको चालक को पकड़ा था और क्लीन चिट देकर छोड़ दिया। हत्याकांड में इस्तेमाल ईको भी छोड़ दी गई।

सुनगढ़ी पुलिस और सर्विलांस टीम लगातार आरोपी को ट्रेस करने में जुटी है। कारागार में जिसे ट्रेस किया था, वह अब कारागार से छूट चुका है। जल्द ही आरोपी को ट्रेस कर घटना का खुलासा किया जाएगा। लापरवाही नहीं बरती जा रही है--- अतुल शर्मा, एसपी पीलीभीत।

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