पीलीभीत: तहसीलदार पर ग्रामीण और वृद्धा को पीटने के आरोप, जानिए पूरा मामला
पीलीभीत/पूरनपुर, अमृत विचार। जेठापुर गांव में सरकारी राशन दुकान की खुली बैठक के दौरान सोमवार को हंगामा हो गया। लोकतंत्र सेनानी के पोते ने बैठक का विरोध किया। जिसका वीडियो लेखपाल ने बनाया तो ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। आरोप है कि इसके बाद तहसीलदार ने युवक को पीटा। बचाने आई उसकी दादी को भी धक्का दे दिया। इसकी सूचना पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता तहसील पहुंचे। वहां दोनों के बीच समझौता करा दिया गया।
कोतवाली क्षेत्र के गांव जेठापुर में सोमवार को सरकारी राशन की दुकान( कोटे) के चयन को लेकर खुली बैठक तहसीलदार ध्रुव नारायण यादव के नेतृत्व में आयोजित की गई। बैठक में कोटा लेने के लिए गांव के जयप्रकाश पुत्र ओम प्रकाश,संतोष,अश्वनी रामेश्वर दयाल और शिवकुमार ने दावेदारी पेश की।समय सीमा समाप्त होने की बात पर गांव निवासी जयप्रकाश ने विरोध जताते हुए कहा कि दादी जग देवी पत्नी बनवारीलाल लोकतंत्र सेनानी हैं।
इसीलिए राशन कोटे की दुकान हमारे हक में होनी चाहिए। चुनाव गलत कराया जा रहा है। तहसीलदार ने लेखपाल राहुल से उसकी वीडियो बनाने के लिए कह दिया। वीडियो बनाने के दौरान लेखपाल और युवक जयप्रकाश रावत की कहासुनी होने लगी और नौबत हाथापाई तक आ गई। तहसीलदार ने बमुश्किल लेखपाल को सरकारी गाड़ी में बैठा कर मौके से निकालने का प्रयास किया। इस दौरान गांव की महिलाओं ने इकट्ठा होकर तहसीलदार की सरकारी गाड़ी का घेराव कर रोकने का काफी प्रयास भी किया।
आरोप है कि तहसीलदार ने युवक को पीट दिया। पास में खड़ी उसकी दादी जगदेवी बचाने दौड़ी,तो उनको भी पीटकर धक्का दे दिया।जिससे वह जमीन पर गिर गई। इससे आक्रोशित लोगों ने जमकर हंगामा किया। मामला बिगड़ते देख तहसीलदार के सुरक्षा गार्ड भी इधर-उधर चले गए। भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता भी पहुंचे और हंगामा किया। तहसील पहुंच कर विरोध प्रदर्शन किया गया।
कोतवाली पहुंचकर दोनों पक्षों तहसीलदार और जयप्रकाश के बीच समझौता करा दिया गया। लेखपाल को मंगलवार तक हटाने का आश्वासन दिया गया है। जिसके बाद मामला शांत हो सका।भारतीय किसान यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष लालू मिश्रा ने बताया कि मंगलवार शाम तक का आश्वासन दिया गया है।अगर इसके बाद लेखपाल को नहीं हटाया गया तो तहसील में धरना प्रदर्शन करेंगे।
इधर तहसीलदार ने बताया कि जयप्रकाश खुली बैठक का विरोध कर रहा था और कह रहा था कि लोकतंत्र सेनानी होने के नाते यह राशन कोटे की दुकान हमें मिलनी चाहिए जिससे बात बिगड़ गई और कोतवाली में पहुंचकर दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। मेरे द्वारा मारपीट किए जाने के आरोप गलत हैं।
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