बरेली: बेटी को विदाई और समयुन को दुआएं

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। तान्या आखिर विदा होकर अपनी ससुराल चली गई और उसके पिता संतोष और मां पारो के सिर से बड़ा बोझ उतर गया। तान्या को विदा करते वक्त संतोष और पारो की आंखों में आंसू थे और जुबान से समाजसेवी समयुन खान के लिए दुआएं फूट रही थीं। तंगहाली के दौर से गुजर रहे संतोष ने तान्या की शादी तो तय कर दी थी लेकिन इंतजाम करने लायक पैसा पास नहीं था। यह जिम्मेदारी समयुन ने अपने ऊपर ली और तान्या का कन्यादान भी खुद ही किया।

नेकपुर की पाल कॉलोनी में रहेन वाले चार बेटियों के पिता संतोष को बड़ी बेटी तान्या की शादी के लिए राज्य सरकार की कन्या सुमंगला योजना से आस थी, इसी भरोसे में उन्होंने तान्या का लखीमपुर खीरी में रिश्ता पक्का कर दिया था। वह दौड़भाग करते रहे मगर सुमंगला के तहत अनुदान पाने के लिए आवेदन तक नहीं कर पाए और शादी की तारीख नजदीक आ गई। संतोष के आग्रह पर समयुन ने पता किया तो मालूम हुआ कि सुमंगला के फार्म ही नहीं मिल रहे हैं। इस पर समयुन ने खुद तान्या की शादी का इंतजाम करने का फैसला लिया।

रविवार रात सादगी के माहौल में तान्या और प्रेम की शादी हो गई। मंडप में बैठकर समयुन ने उसका कन्यादान किया तो लोग हैरान रह गए। सुबह तान्या की मां पारो ने आंखों में आंसू भरकर बेटी को विदाई दी लेकिन जुबान से समयुन खान के लिए दुआएं फूटती रहीं। विदाई के बाद वह इतना भावुक हुईं कि समयुन खान के गले लगकर रोने लगीं। समयुन खान सामाजिक संस्था आस चलाती हैं। संतोष ढाई महीने पहले उनके संपर्क में आए थे।

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