बरेली: बीडीए जियो टैंगिग और गूगल से करेगा अवैध निर्माण की निगरानी
बरेली,अमृत विचार। बीडीए क्षेत्र में जियो टैगिंग के जरिए अवैध कालोनियों की निगरानी गूगल से की जाएगी। मानचित्र के विपरीत होने वाले निर्माण को रोकने के लिए तकनीकी सहारा लेने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए अभिलेखों के आधार पर सेटेलाइट इमेज से महायोजना का बेस मैप तैयार करने की योजना है। इसके …
बरेली,अमृत विचार। बीडीए क्षेत्र में जियो टैगिंग के जरिए अवैध कालोनियों की निगरानी गूगल से की जाएगी। मानचित्र के विपरीत होने वाले निर्माण को रोकने के लिए तकनीकी सहारा लेने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए अभिलेखों के आधार पर सेटेलाइट इमेज से महायोजना का बेस मैप तैयार करने की योजना है। इसके सफल होने से अवैध निर्माण को रोकने में बीडीए को आसानी हो जाएगी।
बरेली विकास प्राधिकरण क्षेत्र में बढ़ी आबादी को सही तरीके से बसाने की नई पहल करने की तैयारी की जा रही है। लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण मास्टर प्लान तैयार करता है, लेकिन जमीनी हकीकत तो यह है कि मास्टर प्लान के हिसाब से कार्य नहीं हो पा रहा है। इसके लिए प्रमुख सचिव शहरी विकास एवं नियोजन दीपक कुमार ने विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अफसरों के लिए नया निर्देश जारी किया है।
इसमें शहर में अवैध कॉलोनियों के निर्माण को रोकने के लिए तकनीकी का सहारा लिया जा रहा है। अब इसरो से संबद्ध संस्था नेशनल रिमोट सेसिंग सेंटर के माध्यम से नया मास्टर प्लान 2031 तैयार करने की योजना है। इसके तहत शहर की सभी अवैध कॉलोनियों की जियो टैगिंग की जाएगी।
जियो टैगिंग होने से गूगल मैप के जरिए यहां होने वाले अवैध निर्माण की निगरानी करने के साथ ही उन्हें रोकने का कार्य भी आसानी से हो सकेगा। जबकि अहम बात यह है कि आला अफसरों से बहाना बनाकर कार्य कराने वाले इंजीनियरों की कार्यशैली पर रोक लग जाएगी। इसके लिए प्राधिकरण के अभिलेखों के आधार पर बीडीए के अफसर सेटेलाइट इमेज से महायोजना का बेस मैप तैयार करेंगे। अभी तक बेस मैप बनाने के लिए सेटेलाइट इमेज का प्रयोग नहीं किया गया था।
विभागीय सूत्रों पर गौर करें तो इसके लिए पहले सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद पूरा डाटा तैयार किया जाएगा। इसका फायदा शमन शुल्क 2020 योजना में भी मिलेगा, क्योंकि सर्वे में सभी अवैध निर्माण का पूरा ब्यौरा बीडीए को मिल जाएगा। अधीक्षण अभियंता आरके जायसवाल ने बताया कि जियो टैंगिग होने से अवैध निर्माण पर रोक लग सकेगी। जबकि गूगल इमेज से पता चल सकेगा कि निर्माण कितना पुराना है। इमेज पर जिम्मेदार अफसरों की नजर भी रहेगी।
