बरेली: हाकिम की चौखट पर पानी के लाले, हैंडपंप खुद प्यासे

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। भीषण गर्मी में सरकारी दफ्तरों में पहुंचने वाले फरियादी दो घूंट पानी के लिए तरस रहे हैं। हैंडपंप और ठंडी पानी की मशीनें खराब पड़ी हैं, जिम्मेदारों ने इन्हें ठीक नहीं कराया है। बुधवार को अमृत विचार ने कलेक्ट्रेट और सदर तहसील का हाल जाना तो फरियादी गर्मी में हलक तर करने को पानी के लिए परेशान होते नजर आए।

दोपहर 2 बजे कलेक्ट्रेट में पहुंचे। यहां गेट के पास लगे हैंडपंप पर कई लोग पानी पीने के लिए पहुंचे। आसमान से बरस रही आग की वजह से तप रहे नल को छूते ही फरियादी के हाथ में जैसे करंट लगा हो। उसने हाथ हटाया। दोबारा हैंडपंप का हत्था पकड़कर कई बार ऊपर-नीचे किया, लेकिन पानी नहीं निकला। पास में खड़े एक कर्मचारी ने बताया कि नल खराब है। यह सुनकर वह शख्स बोला कि, जब कलेक्ट्रेट का यह हाल है तो बाकी जगहों का क्या होगा, जहां जिले के हाकिम बैठते हों।

दफ्तरों में पुराने जमाने के पंखे हांफ रहे
कोषागार दफ्तर में कई कर्मचारी दोपहर के समय काम रहे थे। पंखा से लेकर कूलर तक चल रहा था, लेकिन गर्मी से निजात नहीं मिल रही थी। कोई दफ्ती से हवा कर रहा था तो कोई गमछे से पसीना पोंछ रहा था। निर्वाचन कार्यालय में भी हालात जुदा नहीं थे। पुराने समय के यहां लगे पंखे कहने के लिए तो चल रहे थे, लेकिन उससे निकलने वाली हवा लोगों को राहत नहीं दे रही थी। कुछ ऐसा ही हाल शस्त्रागार कार्यालय, विधानसभा निर्वाचन, चकबंदी कार्यालय में भी देखने को मिला। सदर तहसील में एसडीएम कार्यालय की ओर बढ़ने पर पास में लगी पानी की मशीन खराब पड़ी है।

यह कैसा इंतजाम... इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के पास खाली बाल्टियां
कलेक्ट्रेट में कक्ष नंबर आठ के पास इलेक्ट्रानिक उपकरण रखे हैं। यहां से कलेक्ट्रेट का इलेक्ट्रानिक सिस्टम कंट्रोल होता है। आग से बचाव को लेकर यहां पर एक एंगल पर करीब छह बाल्टियां टंगी है, लेकिन कई में बालू नहीं है। लोगों ने इनमें पान, गुटखा खाकर थूक रखा है। कुछ दिन पहले कलेक्ट्रेट में ट्रांसफार्मर दगने के बाद भी जिम्मेदारों ने सबक नहीं लिया है।

तारीख लगी थी। इसलिए आया था। प्यास लगने पर काफी देर हैंडपंप चलाया, मगर पानी नहीं निकला। हैंडपंप खराब बताया जा रहा है। यह हाल कलेक्ट्रेट का है।-इंद्रपाल सिंह, नवाबगंज

काम के सिलसिले में कलेक्ट्रेट आया था। गर्मी की वजह से प्यास लग रही थी। सोचा नल चलाकर पानी पी लूं, लेकिन पानी निकल नहीं रहा। कम से कम यहां तो व्यवस्थाएं होनी चाहिए।-वीरेंद्र, नवाबगंज

पानी की बोतल 20 रुपये की मिलती। इसलिए सोचा कि हैंडपंप से ही पानी पी लूं, लेकिन कलेक्ट्रेट में लगा हैंडपंप खराब पड़ा है। अब मजबूरी में बाहर से पानी खरीदकर पीना ही पड़ेगा।
विजय, क्योलड़िया

क्यारा ब्लॉक से आया हूं। आने-जाने में 50 रुपये खर्च होते हैं। काफी देर से सदर तहसील में खड़ा हूं। लेखपाल का पता नहीं। पानी की मशीन भी नहीं चल रही।-विदेश, करौंदा

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