NHAI अदालतों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ डाल रहा है: केरल हाई कोर्ट

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कोच्चि। 17 जून (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की आलोचना करते हुए कहा है कि अदालतों पर मुकदमों का बोझ डालना प्राधिकरण की एक आम प्रवृत्ति बन गई है और मुआवजा देने में देरी के कारण भारी ब्याज का भुगतान किया जाता है।

न्यायमूर्ति अमित रावल और न्यायमूर्ति सी. एस. सुधा की खंडपीठ ने कहा कि यदि एनएचएआई उचित सलाह लेता है, तो यह मुकदमेबाजी के खर्च को बचा सकता है और भारी ब्याज का भुगतान करने के बोझ से बच जाएगा। अदालत ने यह आदेश तिरुवनंतपुरम के एक भूमि मालिक द्वारा दायर याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता की संपत्ति एनएचएआई द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग 47 के कझाकुट्टम-करोदे खंड से बचने के लिए बाईपास बनाने के उद्देश्य से अधिग्रहित की गई थी।

सक्षम प्राधिकारी द्वारा तय किए गए मुआवजे से असंतुष्ट भूमि मालिक ने मध्यस्थता का अनुरोध किया और भूमि का मूल्य 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया था। एनएचएआई ने तिरुवनंतपुरम में एक स्थानीय अदालत का रुख कर दावा किया कि यह राशि अधिक है। इसके बाद अदालत ने उस आदेश को रद्द कर दिया।

इसके बाद भूमि मालिक ने उच्च न्यायालय में अपील की। अदालत ने अप्रैल में जारी आदेश में कहा, यह एक आम प्रवृत्ति बन गई है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अनावश्यक रूप से अदालतों पर मुकदमों का बोझ डाल रहा है, राज्य के खजाने को संकट में डाल रहा है, जिससे ब्याज और मुआवजे के भुगतान में देरी हो रही है।

उच्च न्यायालय ने कहा, यदि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण उचित सलाह लेता है तो वह मुकदमेबाजी के खर्च को बचा सकता है और भारी ब्याज के भुगतान के बोझ से बच जाएगा। देश की अर्थव्यवस्था को बचाने में इसका बड़ा असर हो सकता है। केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि निचली अदालत का आदेश मान्य नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन के मालिक भी वैधानिक लाभ के हकदार होंगे। 

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