Jalaun News : सहकारिता चुनाव में जेडीसी के 13 संचालक निर्विरोध निर्वाचित, एक पद रिक्त

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जालौन में सहकारिता चुनाव में जेडीसी के 13 संचालक निर्विरोध निर्वाचित।

जालौन में सहकारिता चुनाव में जेडीसी के 13 संचालक निर्विरोध निर्वाचित। नामांकन के समय दिखा सत्ता का असर, बेरंग लौटे प्रत्याशी।

जालौन, अमृत विचार। जेडीसी संचालक पद के चुनाव में सत्ता की हनक साफ तौर पर देखने को मिली है। भाजपा की सूची के अलावा किसी और को नामांकन दाखिल करने का अवसर नहीं मिला। ऐसा नहीं है कि किसी ने प्रयास नहीं किया। जो लोग चुनाव लड़ने के इच्छुक थे वह समर्थक व प्रस्ताव के साथ पहुंचे लेकिन गेट पर ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। कुल मिलाकर जेडीसी संचालक पद के लिए अलग अलग सीट से एक ही नामांकन दाखिल हुआ। इस स्थिति में 13 संचालक निर्विरोध निर्वाचित हो गए। सीए कोटा का पद रिक्त रह गया।

रविवार को जेडीसी संचालक पद के लिए चुनाव में नामांकन दाखिल होने थे। चुनाव अधिकारी की मौजूदगी में तय समय पर नामांकन पत्र खरीदने और जमा करने का कार्य शुरू हुआ। भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की एक सूची जारी की गई। सूची के आधार पर ही नामांकन फार्म भरने से लेकर जमा करने की प्रक्रिया नामांकन कक्ष में ही हुई। समर्थक व प्रस्तावक के साथ अलग-अलग सीट से एक-एक ही नामांकन दाखिल हुआ। निर्धारित समय पर किसी अन्य के नामांकन दाखिल न करने से 13 संचालक निर्विरोध हो गए।

सीए कोटा महिला के लिए आरक्षित था लिहाजा जिले में भाजपा के पास कोई महिला सीए नहीं थी जिस वजह से यह पद रिक्त रह गया। इस लिहाज से इस बार जोडीसी बोर्ड में एक कुर्सी खाली रहेगी। दोपहर में 3:20 पर जेडीसी सभापति पद के भाजपा से अधिकृत उम्मीदवार बृजभूषण सिंह मुन्नू अन्य साथियों के साथ जेडीसी से बाहर आए तो उनका फूलमाला से जोरदार स्वागत किया गया।

समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूलमाला पहनाई और जिन्दाबाद के नारे लगाए। इस पूरे चुनाव में सत्ता की हनक साफ तौर पर देखने को मिली। यूं तो ज्यादातर सीट पर कोई दूसरा हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहा था लेकिन जिन्होंने हिम्मत जुटाई वह गेट तक ही पहुंच पाए। हरीओम अपने समर्थक व प्रस्तावक के साथ पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक लिया।

इस दौरान गहमा गहमी रही लेकिन पुलिस ने उनका नाम सूची में न होने की बात कहकर लौटा दिया। वह अकेले नहीं थे उनके अलावा अनिल नायक व श्याम मिश्रा थे जो चुनाव लड़ने के लिए तैयार थे लेकिन सत्ता की हनक के आगे वह नामांकन दाखिल ही नहीं कर पाए।

यह रहे निर्विरोध संचालक

कालपी अनारक्षित सीट से बृजभूषण सिंह मुन्नू, उरई अनारक्षित सीट से अरविंद गौतम चच्चू व युद्दवीर सिंह कंथरिया, कोंच अनारक्षित सीट से रविकांत द्विेदी चमारी, अभिमन्यु सिंह डिंपल, महेंद्र सिंह सेंगर लौना, शिशुपाल सिंह, जालौन सीट से महेंद्र सिंह कैंथवा, जालौन आरक्षित से मनोज •ाान वर्मा, जालौन विशेष पिछड़ा वर्ग से गौरव गुर्जर, माधौगढ़ अनारक्षित से मंजुला सिंह, वृत्तिक क्षेत्र कृषि से सुभाष पिंडारी, विधि से आलोक दीक्षित निर्विरोध निर्वाचित हुए है।

जेडीसी चुनाव में भाजपा दिखी दो फाड़

जेडीसी चुनाव में भाजपा दो फाड़ में नजर आई। जिले के 14 संचालकों में से 13 के चयन में विधायकों को कोई तबज्जो नहीं मिली। माधौगढ़ व कोंच क्षेत्र में मिलाकर सात सीटे थीं लेकिन किसी एक पर भी क्षेत्रीय विधायक मूलचंद्र निरंजन को तबज्जो नहीं मिली। उरई विधायक गौरीशंकर वर्मा के लिए तो आरक्षण में बदलाव तक कराया गया। सीए कोटा के तहत विधायक गौरीशंकर वर्मा के पुत्र का निर्वाचित होना तय माना जा रहा था। यहां पर वह पार्टी की गुटबंदी का शिकार हो गए। सीए कोटा को महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। यही वजह रही कि विधायक पुत्र को पीछे हटना पड़ा। इसका असर नामांकन के दौरान देखने को मिला। यहां पर पूर्व विधायक नरेंद्र सिंह जादौन, पूर्व जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष नागेंद्र गुप्ता, जिलाध्यक्ष रामेंद्र सिंह सेंंगर बनाजी तो मौजूद रहे लेकिन दोनों विधायक नदारद थे। यही नहीं हर जगह मौजूद रहने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी भी नजर नहीं आए तो राजनीतिक चर्चाओं ने जन्म ले लिया।

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