Hamirpur News : 47 वर्ष पुराने यमुना पुल में एक बार फिर से पड़ी दरारें, हल्के वाहनों की आवाजाही जारी

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Edited By Amrit Vichar
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हमीरपुर में 47 वर्ष पुराने यमुना पुल में एक बार फिर से पड़ी दरारें।

हमीरपुर में 47 वर्ष पुराने यमुना पुल में एक बार फिर से दरारें पड़ी। हल्के वाहनों की आवाजाही जारी, ओवरलोड वाहनों पर रोक लगी।

हमीरपुर, अमृत विचार। कानपुर सागर टूलेन हाईवे पर बने 47 वर्ष पुराने यमुना नदी के पुल में एक बार फिर से दरार आ गई है। प्रशासन ने यमुना पुल से ओवर लोड वाहनों की निकासी पर सख्ती से रोक लगाते हुए ओवर लोड वाहनों की धरपकड़ को लेकर टीमें लगा दी हैं। पुल की कोठी नंबर 10 और 11 के बीच की स्लैब कभी भी बैठ सकती है। पिछले दिनों पीएनसी और एनएचएआई की टीम ने जांच के बाद प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी थी।

जनपद से गुजरे कानपुर सागर नेशनल हाईवे 34 का यमुना नदी में वर्ष 1976 में पुल बनकर तैयार हुआ था। 16 जून 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने इसका उदघाटन किया था। इस पुल की मियांद पूरी हो चुकी है। वर्ष 2008 से लेकर 2016 के बीच में यमुना नदी का पुल कई बार क्षतिग्रस्त हुआ है। जिसकी मरम्मत में कई-कई दिन लग गए। इससे हमीरपुर का कानपुर से सीधा संपर्क कटा रहा।

कारोबार से लेकर मरीजों तक दिक्कतें हुई है। एक बार फिर से वही स्थिति बन गई है। पिछले दिनों कार्यदायी संस्था पीएनसी और एनएचएआई की संयुक्त टीम ने यमुनाब्रिज का तकनीकी मुआयना किया था। इसके बाद जो रिपोर्ट तैयार की गई, उसमें साफ तौर पर जर्जर हो चुके यमुना नदी के पुल को ओवरलोड वाहनों से खतरा बताया। रिपोर्ट के बाद पीएनसी और एनएचएआई की टीम ने डीएम से मुलाकात की थी। पीएनसी के प्रोजेक्ट मैनेजर एमपी वर्मा ने बताया कि यमुना ब्रिज की बायीं साइड (हमीरपुर से कानपुर की ओर) में क्रेक आ गए हैं।

इस पुल की कोठी नंबर 10 और 11 के बीच की स्लैब भी खराब हो गई है। भारी वाहनों की गुजर से कभी भी धंस सकती है। साइडों में आ रहे क्रेक भी पुल के लिए खतरा है। उन्होंने बताया कि इस पुल की क्षमत 40 टन की है। इसकी मियांद भी निकट चुकी है। पुल से 90 से 120 टन वज के वाहन निकल रहे हैं, जिससे पु को खतरा है। ओवर लोड न रोका गय तो पुल क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिस सभी तरह का आवागमन रुक जाएगा।

47 साल पूर्व बना था यमुना नदी का पुल

यमुना नदी के पुल का उद्घाटन 30 जून 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत नारायणदत्त तिवारी ने किया था। पुल बने हुए 47 साल का लंबा वक्त हो चुका है। तब से यमुना नदी का पुल जनपद की तरक्की में अपना योगदान देता चला आ रहा है। इस अवधि में पुल कई बार क्षतिग्रस्त हुआ। लेकिन अब जो रिपोर्ट आई है वो चौंकाने वाली है।

सातवीं बार यमुना पुल में आई दरार

पिछली बार 19 जून 2016 को यमुना पुल की दूसरी कोठी के ऊपरी हिस्से की स्लैब में दरार आई थी। फिलहाल यमुना पुल सातवीं बार क्षतिग्रस्त हुआ है। इसके पहले यमुना पुल 2009 में इसके बाद 2011, 2013, 2014 व 2015 में दो बार पुल क्षतिग्रस्त हुआ था। ज्यादातर यह पुल जून माह में ही क्षतिग्रस्त हुआ है।

इसी को लेकर तत्कालीन सपा सरकार में जन प्रतिनिधियों की मांग पर दोनों नदियों में बाईपास पुल निर्माण कार्य की स्वीकृति मिली थी। जिनका निर्माण कार्य जारी है। उधर इसी के साथ हाईवे पर बेतवा नदी में बना पुल अभी तक ज्यों का त्यों है। इसके पीछे पुलों की डिजाइन में अंतर बताया जा रहा है। यमुना पुल की कोठियों की स्लैब के बीच बीम नहीं है। जबकि बेतवा पुल में बीम डाले जाने से भारी वाहनों का लोड स्लैब पर अधिक नहीं पड़ता है।

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