बिजनौर: प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सहित छह लोगों पर गबन की रिपोर्ट, पुलिस ने की कार्रवाई

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Edited By Amrit Vichar
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नजीबाबाद (बिजनौर), अमृत विचार। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गबन और धोखाधड़ी में कोर्ट के आदेश पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सहित छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

नगर के पाईबाग निवासी एवीडी नीरज कुमार ने 23 अप्रैल 2023 को सीजीएम कोर्ट में प्रार्थना दिया। इसमें आरोप लगाया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिजनौर तथा प्रभारी चिकित्सा अधिकारी नजीबाबाद ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में वैक्सीन ले जाने तथा छोड़ने के लिए कोल्ड चैन होल्डर के पद पर तैनात किया था। जिसका एक परिचय पत्र भी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी की ओर से हस्ताक्षर कर दिया गया था।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत पूर्व प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. फैज हैदर, मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुशील कुमार, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार, बीपीएम नपेंदर सिंह, बीएम महिपाल सिंह तथा देवेंद्र बाबू ने सुपरवाइजर के पद पर रहते हुए 24 नवंबर 2018 से 12 फरवरी 2019 तक ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में खसरा और रूबेला की वैक्सीन पहुंचाने का भुगतान 1,23,320 रुपये नहीं किया, जबकि शासन ने मार्च 2019 में भुगतान करने के लिए पैसा भेजा था।

 पल्स पोलियो अभियान एक अप्रैल 2021 से 31 अप्रैल 2022 तक ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में वैक्सीन पहुंचाने का बकाया 3,50,000 रुपये का भुगतान भी नहीं किया गया। जबकि, शासन ने 13 मई 2021 को 63,000, 23 नवंबर 2021 को 1,40,000 तथा 1,56,420 रुपये का भुगतान किया था। पीएचसी के कर्मचारी और अधिकारियों ने किए गए कार्य का भुगतान नहीं किया। आरोप है कि जब वह अपने साथियों के साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पास पहुंचे तो बकाया धनराशि 4,89,445 रुपये देने से मना कर दिया। 

दोबारा रुपये मांगने पर विभाग के गबन के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी और डीएम को प्रार्थना पत्र दिया, परंतु कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत करने पर मुझे नौकरी से हटा दिया गया। इसके बाद कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए। पुलिस ने रविवार को पूर्व चिकित्सा अधिकारी फेज हैदर समेत छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। इस संबंध में मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा इसकी विभागीय जांच की गई थी, जिसमें मेरा और डॉ. फैज हैदर का कोई मामला नहीं था, बल्कि अन्य नाम प्रकाश में आए थे। सच्चाई से पुलिस और विवेचना अधिकारी को अवगत कराया जाएगा। 

  पूर्व प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. फेज हैदर ने बताया कि उनके कार्यकाल का मामला नही है। न ही इस संबंध में उनके हस्ताक्षर से कोई गलत भुगतान किया गया है। मैंने 15 नवंबर 2020 से अप्रैल 2021 तक कार्य किया है। अपने दूसरे संक्षिप्त कार्यकाल में भी मेरी ओर से कोई गलत भुगतान नहीं किया गया है। मैं  स्वदेश वापसी पर पुलिस और कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखूंगा।

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