बरेली: चला निर्विवाद वरासत अभियान तो खतौनियों में जिंदा मिले 1291 मृत किसान
अभियान का पहला चरण पूरा, खतौनियों में मृत किसानों के वारिसों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया तेज
बरेली, अमृत विचार। जिले में निर्विवाद वरासत अभियान के दौरान स्वर्ग सिधार चुके 1291 किसानों के नाम खतौनियों में दर्ज मिले हैं। इन सभी का नाम हटाकर उनके वारिसों का नाम खतौनी में दर्ज किया गया है। पहले चरण का काम पूरा होने के बाद कर रिपोर्ट ऑनलाइन कर दी गई है। अब दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है।
खतौनी में खातेदार यानी पंजीकृत किसान की मौत होने के बाद नियमानुसार उसके वारिस का नाम दर्ज होना चाहिए लेकिन नाम परिवर्तन के लिए वारिसों को काफी भागदौड़ करनी पड़ती है। राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार की वजह से भी इस काम में काफी अड़चनें आती हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए शासन के आदेश पर निर्विवादित वरासत अभियान चलाया जा रहा है जो 30 मई को शुरू हुआ था और 31 जुलाई तक चलना है।
इस अभियान का पहला चरण 15 जून को पूरा हो चुका है। इसके बाद पोर्टल पर अपलोड की गई सूचना के अनुसार 15 दिन के अभियान में टीम ने जिले में 1291 ऐसे खातेदारों को चिह्नित किया है जिनकी मौत हो चुकी है। उनके नाम खतौनी से हटाकर राजस्व टीम ने उनके वारिसों से आवेदन लेकर उनके नाम खतौनी में दर्ज करने की कार्रवाई तेज कर दी है।
ऐसे किया गया सत्यापन
सहायक भूलेख अधिकारी संतोष अवस्थी ने बताया सत्यापन के लिए गांवों में लेखपाल टीम के साथ पहुंचते हैं। खतौनी पढ़ने के दौरान मृतक किसानों की जानकारी सामने आती है। उसके वारिस से आवेदन लेकर उत्तराधिकारी बनाया जाता है।
तहसील पर स्थापित किए गए पटल
सहायक भूलेख अधिकारी के अनुसार सत्यापन के लिए गांवों में पहुंची टीमों को काफी संख्या में वे लोग नहीं मिले जो बाहर रहते हैं। ऐसे में उनकी सुविधा के लिए (खतौनी में उत्तराधिकारी) के लिए प्रत्येक तहसील में एक पटल स्थापित किया गया है, जहां पर जाकर आवेदन करके खतौनी में उत्तराधिकारी बन सकते हैं। अब तक 28 लोगों ने उत्तराधिकारी के लिए आवेदन किए हैं।
2154 राजस्व गांव हैं कुल मिलाकर जिले में
1333 गांवों में सत्यापन हुआ है पहले चरण में
899 वाद उत्तराधिकार संबंधी दर्ज किए गए हैं
657 वारिसों के नाम खतौनी में चढ़ाने के आदेश
25 विवादित प्रकरण तहसीलदार को भेजे गए
609 मामले राजस्व निरीक्षक के स्तर पर लंबित
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