बाहरी दुनिया में नहीं मनुष्य के भीतर ही है परमेश्वर का निवास-प्रबुद्धानंद
जयपुर। स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी प्रबुद्धानंद सरस्वती ने विश्वास में अध्यात्म बताते हुए कहा है कि मनुष्य हमेशा भौतिक चीज़ों में ईश्वर को ढूंढता है लेकिन उसे यह समझने की जरूरत है कि परमेश्वर उसके भीतर है।
स्वामी प्रबुद्धानंद सरस्वती बुधवार को यहां मंगलवार को शुरू हुआ श्रीमद्भागवत गीता पर तीन दिवसीय प्रवचन कार्यक्रम "तत त्वम् असि" में श्रीमद्भागवत में व्याप्त ईश्वरीय ज्ञान और अध्यात्म पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वेदांत का कोई विकल्प नहीं है। हिंदू धर्म में अद्वैतवाद व्याप्त हैं।
जहां मनुष्य स्वयंसिद्ध है। उन्होंने आत्मा का वेद से जुड़ाव को ही श्रीमद्भागवत का परम उद्देश्य बताया है। उन्होंने कहा कि कर्मकांड अध्यास (मिथ्या ज्ञान )को मिटाते नहीं हैं लेकिन वेदांत अध्यास को मिटा सकते हैं। सारी प्रवृत्ति - निवृत्ति भी अध्यास में ही निहित है। जिस प्रकार स्वर्ग के होने के बारे में सर्वज्ञ ज्ञान मिथ्या नहीं कहा जा सकता ।
स्वामी प्रबुद्धानंद ने पहले ही दिन श्रीमद्भागवत गीता के छह अध्यायों को एक घंटे से कम समय में सारगर्भित स्वरूप में समझाया। कार्यक्रम में कर्मयोगी अलंकार से कई गणमान्य लोगों का सम्मान भी किया गया। सम्मानित होने वाले लोगों में डा रामस्वरूप रावतसरे, कर्नल वी.एस. भालोठिया, गोविंद भारद्वाज, डॉ. पी.सी. ट्रैवेदी, अंशू सुराणा, ढाका राम, अंकित गांधी, पंकज शर्मा, जीतेन्द्र शर्मा , अंकित खंडेलवाल, बी.एस.रावत, मधु सूदन, ललित शर्मा, यतेंद्र नेगी, संजय पाराशर, मुकेश भारद्वाज, एम.एल. शर्मा, चित्रा गोयल, डॉ. नीरज रावत, शीतल शर्मा, डॉ. रजनीश शर्मा, विष्णु शर्मा , एन.के.पांडेय, पुनित भटनागर, रीमा सिंह, नरेश गोयल, डॉ. विनोद शुक्ला और श्रीकृष्ण पाद दास शामिल हैं।
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