बरेली: जिला महिला अस्पताल: बरेली में 140 बच्चों की मौत के बाद भी उठा रहे जोखिम, जानें पूरा मामला

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Edited By Amrit Vichar
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एसएनसीयू में एक रेडियंट वार्मर पर दो-दो बच्चे भर्ती, संक्रमण फैलने का खतरा नजरंदाज

बरेली, अमृत विचार। पिछले साढ़े पांच महीनों में 140 नवजात शिशुओं की मौत के बावजूद जिला महिला अस्पताल प्रबंधन एसएनसीयू में भर्ती बच्चों की जान जोखिम में डाल रहा है। यहां 12 रेडियंट वार्मर पर 15 बच्चों को भर्ती कर दिया गया है। तीन वार्मर पर दो-दो बच्चे हैं। इन्हें एक-दूसरे से संक्रमित होने का खतरा है लेकिन फिर भी उसे नजरंदाज किया जा रहा है।

जिला महिला अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत की दर तेजी से बढ़ी है। पिछले 15 दिनों में भी दो शिशुओं की मौत हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद लापरवाही बरती जा रही है। महिला अस्पताल के एसएनसीयू (सिक एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) में एक-एक रेडियंट वार्मर पर दो-दो नवजात बच्चों को भर्जी कर इलाज किया जा रहा है।

वैसे तो यह मजबूरी भी है कि एसएनसीयू में 12 ही रेडियंट वार्मर है लेकिन इससे नवजात बच्चों के संक्रमित होने का खतरा है जिसे नजरंदाज किया जा रहा है। यह मामला अफसरों की जानकारी में होने के बाद भी कोई हल नहीं ढूंढा नहीं जा रहा है।

बता दें कि एसएनसीयू में गंभीर हालत में बच्चों को भर्ती किया जाता है। ज्यादातर केसों में प्री-मैच्योर शिशुओं को रेडिएंट वार्मर की जरूरत होती है। एक ही मशीन में दो बच्चों को एक साथ लिटाने से उनमें संक्रमण फैल सकता है। गाइडलाइन के अनुसार भी ऐसा करना गलत है।

इसलिए जरूरी है रेडिएंट वार्मर
यह एक ऐसा उपकरण है जो बच्चों को न ज्यादा सर्दी लगने देता है और न गर्मी। इसमें जिस बच्चे जितनी गर्मी की जरूरत होगी, यह मशीन उसे उतनी ही गर्मी देती है। नवजात शिशु के शरीर का तापमान स्थिर रहता है तो वह जल्द स्वस्थ होता है।

गंभीर बच्चों को रेडिएंट वार्मर पर भर्ती करना जरूर होता है। संख्या ज्यादा होने के कारण दो बच्चों को एक साथ भर्ती करना पड़ रहा है। सीएचसी-पीएचसी से गंभीर हालत में बच्चे यहां भेजे जाते हैं। स्टाफ को पूरी सावधानी से इलाज करने का निर्देश दिया है। - डॉ. पुष्पलता शमी, सीएमएस जिला महिला अस्पताल

एक रेडिएंट वार्मर पर दो बच्चों को लिटाना ही नियमविरुद्ध है। मशीन में एक ही लीड होती है जो एक ही बच्चे के शरीर का तापमान स्थिर रख सकती है। साथ में भर्ती दूसरे बच्चों को परेशानी हो सकती है। गर्मी में ज्यादातर प्री मैच्योर बच्चों को रेडिएंट वार्मर की जरूरत होती है--- डॉ. अतुल अग्रवाल, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ।

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