बरेली: टूटी नालियां और जलभराव है दौलतपुर...नवदिया और करेना की पहचान, गोद लेने के बाद भी नहीं हुआ विकास

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घोषित आदर्श गांव योजना के तहत आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने जिस ग्राम पंचायत को गोद लिया था, उसका नाम करैना है। भुता ब्लॉक की इस ग्राम पंचायत में करैना के साथ दौलतपुर और नवदिया गांव भी शामिल हैं। सांसद के गोद लेने के बावजूद इन गांवों की दशा नहीं बदली। दौलतपुर और नवदिया का हाल तो साफ बता रहा है कि कोई सरकारी योजना यहां झांकी तक नहीं है।

सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने इस ग्राम पंचायत के तीनों गांवों 2020-21 में गोद लिया था। आदर्श ग्राम योजना में चुने जाने के बाद अधिकारियों ने गांवों का सर्वे किया तो लोगों में जैसे खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन ढाई साल बाद अब यह स्थिति है कि सांसद के आदर्श गांव की बात जुबां पर आते ही लोग तल्ख होने लगते हैं। अपनी समस्याओं की लंबी फेहरिस्त सामने रखने के साथ साफ कहते हैं कि सांसद ने वादे तो बहुत किए लेकिन उन्हें पूरा करने पर कोई ध्यान नहीं दिया। चुनाव जीतने के बाद एकाध बार करैना तो आए लेकिन बाकी दोनों गांवों का हाल लेने के लिए उधर रुख तक नहीं किया।

दौलतपुर, वोटर- 800
सभी गलियां कच्ची हैं, बरसात में पूरे गांव के रास्ते कीचड़ के कारण दलदल जैसी हालत में पहुंच जाते हैं। पानी की निकासी ग्राम समाज की जगह पर होती है, जहां तालाब बन गया है।

करैना, वोटर- 1200
बाकी दोनों गांवों से दशा कुछ ठीक लेकिन फिर भी समस्याएं कम नहीं हैं। प्रधान का आरोप है कि पीएम आवास के लिए कोई सुनवाई नहीं हुई। कुछ सड़कें बन गईं लेकिन कई अधूरी पड़ी हैं।

नवदिया, वोटर- 400
संपर्क मार्गों के साथ गांव की गलियां भी बदहाल हैं, जिनमें गंदा पानी और कीचड़ फैला है। नालियां टूटी हैं। बारिश में गांव में बेतहाशा पानी भर जाता है। सरकारी हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़ा है।

निराशा में बदल चुकी है बेघर लोगों की पीएम आवास मिलने की उम्मीद
दौलतपुर और नवदिया में ज्यादातर परिवार खपरैल के मकान में रहते हैं। कई ऐसे हैं जिनका कच्चा मकान बारिश में ढह चुका है, लेकिन फिर भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत छत मिलने की आस पूरी नहीं हो पाई। गांव वालों का कहना है कि कई साल पहले अधिकारियों ने गांव में आवासविहीन लोगों को चिह्नित किया था। लोगों में इसके बाद जल्द मकान मिलने की उम्मीद जगी थी लेकिन वह उम्मीद ही रह गई। तमाम लोग अब भी खुले आसमान के नीचे बस कर रहे हैं। दौलतपुर की माधुरी भी इनमें एक हैं जिनकी उम्मीद अब दुख और निराशा में बदल चुकी है। कहती हैं, कोई हमारा दर्द सुनने को तैयार नहीं है।

पेंशन और सम्मान निधि की योजनाएं फेल, चक्कर लगा-लगाकर हारे लोग
गांव में वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के तमाम पात्र हैं लेकिन कई बार आवेदन करने और दौड़भाग करने के बावजूद उनकी पेंशन अब तक स्वीकृत नहीं की जा सकी है।

इन लोगों का कहना है कि वे इस बारे में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के अलावा जिला मुख्यालय के अफसरों से भी तमाम शिकायतें कर चुके हैं। प्रधानमंत्री सम्मान निधि और स्वच्छता मिशन के तहत बनाए जाने वाले शौचालय भी इस गांव के लोगों के लिए अब तक सपना है। सांसद आदर्श गांव चुने गए तीनों गांव के लोग बताते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए गांव में एक साल से शिविर तक नहीं लगाया गया है।

किस्मत में बचीं सिर्फ टूटी उम्मीदें
पिछले 10 साल में गांव में कोई काम नहीं हुआ। रास्ते और नालियां ठीक हो जाते तो भी बहुत था। थोड़ी सी बारिश में सड़कों के साथ घरों में पानी भर जाता है। आदर्श जैसा कुछ इस गांव में नहीं हुआ। सांसद विधायक हों या प्रधान, चुनाव में वोट लेने के बाद कोई फिक्र नहीं करता। - मान सिंह सागर, दौलतपुर

गांव में कोई सड़क पक्की नहीं है। पुराने खड़ंजे पड़े है। पीडब्ल्यूडी की सड़क ने गांव की लाज बचा रखी है। सांसद को कभी गांव में नहीं देखा। विधानसभा चुनाव के समय एक जनप्रतिनिधि आए थे, समस्या बताने पर कहने लगे तुम लोग सांसद-विधायक को थोड़े ही, मोदी को वोट देते हो--- मंगली प्रसाद, दौलतपुर।

गांव में कई परिवार खपरैल में रहते हैं। पात्र होने के बाद भी पीएम आवास का लाभ नहीं दिया जाता। दौलतपुर, नवदिया और करैना के प्रधान करैना में रहते हैं। वह सिर्फ अपने गांव में काम कराने पर ध्यान देते हैं। सांसद को भी इसी गांव से ज्यादा वोट मिले थे इसलिए दूसरे गांव झांकने नहीं जाते--- मुन्नालाल, दौलतपुर।

ग्राम समाज की जगह को तालाब बना दिया है। निकास न होने से पूरे गांव का पानी इसी तालाब में जाता है। तालाब से सटा मकान ढहने के कगार पर पहुंच गया है। जब मकान बनाया था कोई निकास नहीं था। सांसद तो दूर, प्रधान भी नहीं सुनते। पूरा गांव दिक्कतें झेल रहा है, कोई सुनने वाला नहीं है--- रामप्यारी, दौलतपुर।

गांव में कई घरों में शौचालय नहीं है। ग्राम प्रधान से कई बार संपर्क किया। खुले में शौच जाना तमाम लोगों मजबूरी है। आवारा पशुओं की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। सांसद के गोद लिए जाने के बाद भी इस गांव किसी तरह का कोई विकास तो दूर, उसके बारे में अब तक कोई चर्चा तक नहीं हुई है--- नन्हेलाल, दौलतपुर।

सांसद के आदर्श गांव के तौर पर ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिसे दौलतपुर गांव के लिए उपलब्धि बताया जा सके। गांव के संपर्क मार्गों की दशा तक खराब है। बारिश होने पर गांव के भीतर तक पानी भर जाने की समस्या आम है। पीएम आवास मिला ही नहीं, चक्कर पर चक्कर काटने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती--- माधुरी देवी, दौलतपुर।

दस साल में गांव में कोई विकास नहीं हुआ। जो भी काम हुए, हम लोगों ने ही कराए हैं। सांसद के गांव को गोद लेने के बाद अधिकारी आए थे, वादे भी किए लेकिन हुआ कुछ नहीं। पीएम आवास के लिए मैं खुद मिला लेकिन हर बार टालमटोल कर दी गई। पूर्व प्रधान ने काम कराया होता तो गांव वाले परेशान न होते--- मूंगालाल कश्यप, प्रधान करैना।

गांव में पहले कभी कोई काम नहीं हुआ। वर्तमान प्रधान के कार्यकाल में सड़कें पड़ना शुरू हुई हैं। सांसद धर्मेंद्र कश्यप अक्सर गांव में आते रहते हैं। उनको समस्या से अवगत कराया गया है। सीमेंट की टाइल्स वाली रोड गांव की कई गलियां में पड़ चुकी है। अधिकारी साथ दें तो विकास तेजी से होगा---सत्यपाल, करैना।

प्रधान ने गांव में कोई काम नहीं कराया। मुख्य मार्ग पर हर समय पानी भरा रहता है। नालियों में झाड़ियां उगी हैं। बारिश में घरों में पानी घुस जाता हैं। सांसद कभी गांव आते तो दर्द समझ पाते। वह सिर्फ करैना गांव तक ही सीमित रहे। लोकसभा चुनाव के लिए वोट मांगने पर हिसाब लिया जाएगा---सामंत सिंह, नवदिया।

गांव के भीतर आने-जाने का रास्ता भी अच्छा नहीं हुआ। बरसात के समय गढ्ढों में पानी भर जाता है। गांव में एक अर्से से कोई सफाई कर्मचारी तक नहीं आता है। इस बारे में कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई समाधान हुआ न किसी गंभीरता से लिया। अब बारिश में तो हालत ज्यादा खराब हो जाएंगे---रक्षपाल, नवदिया।

जब सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने गांव को गोद लिया है तो उनको अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। पूर्व प्रधान हो या वर्तमान प्रधान, किसी ने सुध नहीं ली। हमारे तो घर के बाहर ही नालियां महीनों से चोक हैं। पूरे गांव का यही हाल है। गांव के विकास के वादे करके वोट लेते है और चुनाव बाद भूल जाते हैं---अवधेश सिंह, नवदिया।

गांव में रास्ते और नालियां तक ठीक नहीं हैं। अधिकारी हो या जनप्रतिनिधि, कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं। घर के बाहर बैठना दूभर है। बारिश में गांव तालाब बन जाता है। जानवर डूब जाते हैं। सरकारी हैंडपंप खराब हुए लंबे समय हो चुका है। नालियां भी चोक हैं। लोग नरक जैसी जिंदगी जी रहे हैं--- माया देवी, नवदिया।

पेयजल योजना के तहत गोद लिए गांवों के प्रत्येक घर में पेयजल उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है। जहां सड़कों की स्थिति ठीक नहीं है, वहां सड़कों को जल्द बनवाएंगे। बिजली की सप्लाई सुचारू रूप से चल रही है। प्रत्येक घर में बिजली के कनेक्शन कराए जा रहे हैं। गांव की सफाई के लिए डीपीआरओ को समय-समय पर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं--- धर्मेंद्र कश्यप, सांसद।

कदम-कदम पर समस्याएं-
1- तीनों गांवों में रास्तों की हालत खराब हैं। दौलतपुर और नवदिया यह समस्या विकराल जैसी स्थिति में है।
2- नालियां टूटी हैं या चोक पड़ी हुई हैं। पानी के निकास के इंतजाम न होने से गांवों में बरसात का पानी भर जाता है।
3- पूरे जिले को ओडीएफ घोषित कर दिए जाने के बावजूद तमाम परिवारों के पास शौचालय नहीं है। ये लोग खुले में शौच जाते हैं।
4- बिजली का हाल खराब है। तमाम घरों में कनेक्शन नहीं है, लाइनें भी जर्जर हैं। लोगों को काम के लिए इधर-उधर भागना पड़ता है।
5- तीनों गांवों में बेरोजगारों की भरमार है। ऐसे लोग सैकड़ों में है जिन्हें मजदूरी न मिलने पर घर की जरूरतें पूरी होना मुश्किल हो जाता है।

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