सिंध इतिहास एवं साहित्य शोध संस्थान का हुआ शुभारंभ, भविष्य में युवाओं के लिए मुख्य भूमिका करेगा अदा
अजमेर। राजस्थान के अजमेर में सिन्धी समाज महासमिति की ओर से नए प्रकल्प ’सिन्ध इतिहास एवं साहित्य शोध संस्थान का आज यहां विधिवत शुभांरभ पूजा अर्चना, मोली के बंधन एवं गणेश अराधना से शुभारंभ हुआ।
अमरापुर सेवा घर, प्रगति नगर, कोटड़ा, अजमेर के द्वितीय तल पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सिन्धी अकादमी के अध्यक्ष रहे मोहनलाल वाधवाणी ने अपने अनुभव के आधार पर सिन्धी अकादमी व राष्ट्रीय सिन्धी भाषा विकास परिषद में शोध कार्य का महत्व बताते हुए कहां कि यदि मन में कोई धारणा बना ले तो कोई काम मुश्किल नहीं होता है। शोध संस्थान का यह प्रकल्प आने वाले भविष्य में युवाओं को भाषा से इतिहास, साहित्य की जानकारी देकर उसे अग्रीम पंक्ति में खड़ा करने में मुख्य भूमिका अदा करेगा।
यह शोध संस्थान देश दुनिया में अपनी सफलता से विशेष पहचान बनायेगा जिसके लिये सिन्धु सभा पूर्ण सहयोग करेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुधार सभा के संरक्षक ईश्वर ठाराणी ने कहां कि अजमेर हमेशा सिन्धी विषय को लेकर अग्रिणीय रहा है। 1947 में विभाजन के बाद अजमेर में 2 माह के अन्दर ही उच्च शिक्षा तक सिन्धी स्कूल प्रारम्भ हो गया था एवं आज सिन्ध इतिहास एवं साहित्य शोध संस्थान की स्थापना सबसे पहले अजमेर में हुई है जो आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगी।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक गिरधर तेजवानी ने कहां कि युवा पीढी को सिन्धी विषय पर लेखन कार्य एवं ऑनलाइन प्रचार पर जुडाव एवं सक्रियता से भाग लेना चाहिए। सिन्धी सेन्ट्रल पंचायत के उपाध्यक्ष एवं भारतीय सिन्धु सभा के राष्ट्रीय मंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने कहां सिन्धी विश्वविद्यालय की स्थापना अवश्य हो एवं महाराजा दाहरसेन तथा उसके परिवार के बलिदान से प्रेरणा लेकर शोध काम में युवा पीढ़ी को आगे बढ़ना चाहिए।
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