बरेली खनन विभाग: अवैध परिवहन प्रपत्रों का खेल...ऑडिट में पीडब्ल्यूडी का पर्दाफाश

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Edited By Amrit Vichar
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पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय और निर्माण खंड के अभिलेखों में 42.32 लाख की राजस्व चोरी पकड़ी, बिना सत्यापन कराए ठेकेदारों को कर दिया गया भुगतान,अवैध परिवहन प्रपत्रों के साथ अन्य जनपदों के प्रपत्रों को बरेली का दिखाया गया

राकेश शर्मा, बरेली, अमृत विचार : उप खनिज मंगाने के लिए अवैध परिवहन प्रपत्रों का प्रयोग करते हुए लोक निर्माण विभाग और खनन विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदारों को मोटा लाभ पहुंचाया है। परिवहन प्रपत्रों का सत्यापन कराए बिना ठेकेदारों काे भुगतान कर दिया। मिलीभगत के इस खेल में राज्य सरकार को 42 लाख 32 हजार 708 रुपये का चूना लगा है।

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लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता निर्माण खंड और प्रांतीय खंड के अभिलेखों की जांच में बड़े स्तर का खेल पकड़ा गया। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के सीनियर ऑडिटर ऑफिसर ने अभिलेखों के ऑडिट में अवैध एमएम-11 प्रपत्रों का प्रयोग होने के साथ अन्य जिलों के एमएम-11 प्रपत्रों काे बरेली के प्रपत्र दिखाकर खेल करने की बात सामने आई।

ऑडिट रिपोर्ट में खनन विभाग की लापरवाही के साथ राजस्व वसूलने की कार्यवाही नहीं करने की बात खुली है। सीनियर ऑडिटर ऑफिसर राजेश कुमार ने पूरी रिपोर्ट जिला खान अधिकारी को भेजी है। भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की ओर से कराई गई लेखा परीक्षा में कार्यदायी संस्थाओं द्वारा ठेकेदारों को किए गए बिलों के भुगतान में एमएम-11 प्रपत्रों में कमियां पाई गईं।

कार्यदायी संस्थाओं ने खनन विभाग से एमएम-11/परिवहन प्रपत्रों का बिना सत्यापन कराए ठेकेदारों को भुगतान कर दिया। कार्यालय अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड बरेली के बिल एवं अन्य अभिलेखों की जांच की गई।

जिसमें पाया गया कि कार्यादेशों के तहत अनुबंध की तारीख 23 सितंबर 2022, 14 नवंबर 2022 और 14 नवंबर 2022 के बाद ठेकेदार ने बिल के समर्थन में उप खनिज के लिए जो एमएम-11 प्रपत्र प्रस्तुत किए, वे अनुबंध समाप्ति/कार्य के निरीक्षण के बाद के निकले। इस प्रकार अवैध एमएम-11 प्रपत्रों का प्रयोग कर 3 लाख 42 हजार 332 रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। इसके अतिरिक्त 11 प्रपत्राें का प्रयोग अवैध रूप से किया, जिसमें 6 लाख 94 हजार 44 रुपये का नुकसान हुआ।

कार्यालय अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड-1 के बिल एवं अन्य अभिलेखों की जांच की गई। जिसमें कार्यादेशों के अनुबंध की तारीख 27 अगस्त 2021, 28 अक्टूबर 2021 के बाद ठेकेदार द्वारा बिल के समर्थन में प्रस्तुत किए एमएम-11 प्रपत्र जनपद बरेली के न होकर अन्य जनपदों के हैं।

इस प्रकार अवैध एमएम-11 प्रपत्रों का प्रयोग कर नौ लाख 6 हजार 340 रुपये के राजस्व का नुकसान किया। इसके अतिरिक्त अन्य अनुबंधों में एमएम-11 प्रपत्रों का अवैध रूप से प्रयोग करते हुए 7 लाख 95 हजार 268 रुपये के राजस्व का चूना लगाया।

कार्यालय अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड (भवन) बरेली के बिल एवं अन्य अभिलेखों की जांच में कार्यादेशों के तहत किए अनुबंधों की तारीख 14 अप्रैल 2021 के बाद ठेकेदार ने जो बिल प्रस्तुत किए, वह बरेली जनपद के न होकर अन्य जनपदों के निकले।

अवैध एमएम-11 प्रपत्रों का प्रयोग कर 9 लाख 28 हजार 932 रुपये के राजस्व को नुकसान किया। इसके अतिरिक्त 15 अप्रैल 2021 को किए अनुबंध के बाद बिल के समर्थन में जो भी प्रपत्र प्रस्तुत किए, वे एमएम-11 प्रपत्र में संबंधित कार्य की समाप्ति के बाद के हैं। इसमें 5 लाख 64 हजार 792 रुपये के राजस्व का नुकसान किया।

11 लाख 8 हजार 319 रुपये की डीएमएफ धनराशि जमा नहीं कराई:  जिला खनिज फाउंडेशन न्याय में स्वामित्व धनराशि के 10 प्रतिशत के बराबर की धनराशि 17 सितंबर 2015 से कटौती करने का आदेश है।

31 दिसंबर 2017 के बाद पट्टा धारक द्वारा विलंब से जमा की जाने वाली धनराशि पर देयता की तिथि व देय धनराशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भी भुगतान करना होता है लेकिन कार्यालय जिला खान अधिकारी की लेखा परीक्षा के दौरान जनपद के पट्टा पत्रावलियों की नमूनों की जांच में खेल पकड़ा गया।

दो बालू पट्टा धारकों की पत्रावलियों की जांच में पट्टाधारक मेसर्स बुक स्मार्ट द्वारा दिए गए विवरण के अनुसार जमा रॉयल्टी के विरुद्ध डीएमएफ की धनराशि जमा नहीं की गई। न ही खान विभाग ने 11 लाख 8 हजार 319 रुपये का राजस्व जमा कराने की कोशिश नहीं की।

पट्टा धारकों पर ब्याज की धनराशि 4.99 लाख नहीं लगाई:  पट्टा धारकों के रॉयल्टी के अभिलेख भी लेखा टीम ने चेक किए। जिसमें पट्टाधारक मेसर्स बुक स्मार्ट ट्रक ने रॉयल्टी/स्वामित्व एवं अन्य देय धनराशि का भुगतान विलंब से किया है, जिस पर नियमानुसार 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से ब्याज लगाया जाना था लेकिन विलंब की अवधि पर खनिज नियमावली के प्रावधानों के अनुसार देय ब्याज की वसूली खनन विभाग ने नहीं की। इससे 4 लाख 99 हजार 870 रुपये का नुकसान हुआ।

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