Kanpur News: कालानमक और समुद्र चीनी चावल बढ़ाएगा किचन का स्वाद, शहर में खुलेगा राइस स्टूडियो, पढ़ें- पूरी खबर
कानपुर में राइस स्टूडियो खुलेगा।
कानपुर में राइस स्टूडियो खुलेगा। कालानमक और समुद्र चीनी चावल किचन का स्वाद बढ़ाएगा। एक जगह चावल की कई प्रजातियां मिलेंगी।
कानपुर, [अभिषेक वर्मा]। आपके खाने की थाली में जल्द ही मध्य प्रदेश का समुद्र चीनी और सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल स्वाद बढ़ाएगा। अभी आम दुकानों पर यह चावल मिलना मुश्किल है। लेकिन, शहर के लोगों को अलग-अलग प्रदेशों और जिलों में उत्पादित होने वाले 30 किस्म के चावल एक स्थान पर ही मिलेंगे। जिससे लोगों को चावल की विविधता मिलना शुरू हो जाएगी। दरअसल, शहर में राइस स्टूडियो खोलने की पहल शुरू हुई है। वाराणसी की तर्ज पर उपायुक्त उद्योग के प्रस्ताव को डीएम ने दी हरी झंडी दी है, इसके लिए नगर निगम की दुकान भी खोजी जा रही है।
उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार ने बताया कि वाराणसी में देश का पहला राइस स्टूडियो खोला गया है। इसमें देश भर के चावल की खास 30 से अधिक प्रजातियों के चावल उपलब्ध हैं। यहां सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल के साथ कई चावलों की भी ब्रांडिंग और मार्केटिंग हो रही है। जिले के कटहना निवासी विजय मिश्र ने यह स्टूडियो खोला है, जिसे लोगों के बीच जगह बनाने में सफलता मिली है।
सुधीर कुमार ने बताया कि विजय मिश्रा कानपुर में दूसरा राइस मिल खोलना चाहते हैं। इसके लिए डीएम विशाख जी अय्यर ने अपनी सहमति दी है। अब शहर में नगर निगम की लीज पर दुकान खोजने की तैयारी है। राइस स्टूडियों के खुलने के बाद शहर में एक जगह लोगों को चावल की कई प्रजातियां मिल जाएंगी।
पहले पकाकर खाएं फिर खरीदकर ले जाएं
राइस स्टूडियो की खासियत यह होगी कि यहां खरीदने से पहले आप चावल को पकाकर भी देख सकेंगे। स्टूडियों में ग्राहकों के लिए अलग किचन भी होगा। जहां चावलों को पकाने की सुविधा भी होगी। ग्राहक यहां पहले अपनी मन पसंद चावल का चयन कर उसे बनाकर खा भी सकेंगे। इसके बाद खरीदकर ले जाने की सुविधा होगी। इसका मकसद आम-लोगों को चावलों की किस्मों से करीब से परिचित कराना होगा। यहां चावलों की विविधता और उसकी खासियत की जानकारी भी ग्राहकों को दी जाएगी।
कालानमक चावल में बासमति से ज्यादा तत्व
विशेषज्ञों के अनुसार कालानमक चावल में बासमति की अपेक्षा अधिक तत्व होते हैं। लेकिन बासमती की तर्ज पर कालानमक चावल को प्रोत्साहन नहीं मिला है। विजय मिश्रा ने बताया कि नए नियम के अनुसार गैर बासमती चावल के निर्यात पर 20 प्रतिशत शुल्क जमा करना पड़ रहा है। इस कारण कालानमक चावल के निर्यात में भी कीमत बढ़ गई है और निर्यात भी प्रभावित होने लगा है। ऐसे प्रतिस्पर्धा के दौर में राइस स्टूडियो होने से कालानमक चावल को एक और प्लेटफार्म मिला है। जिससे इसकी मांग बढ़ रही है।
स्टूडियो में मिलेंगी चावल की यह प्रजातियां
स्टूडियों में तिन्नी का चावल भी मिलेगा जो व्रत में खाया जाता है। इसके साथ ही कश्मीर का कश्मीरी, छत्तीसगढ़ का देवीभोग, मध्य प्रदेश का समुद्र चीनी, केरल का पोकाली, मणिपुर का काला चावल, त्रिपुरा का बंबो राइस, आंध्र प्रदेश का नवारा, मेघालय का पहाड़ी ब्लैक राइस, छत्तीसगढ़ के जावा फूल, अरूणाचल स्पीकी सहित 30 प्रजातियों का चावल राइस स्टूडियो में उपलब्ध होगा। इसके अलावा अन्य चावल भी यहां मिलेंगे।
वाराणसी के रहने वाले विजय मिश्र ने शहर में राइस स्टूडियो खोलने का प्रस्ताव रखा है। यह वहां पहले से चला रहे हैं। राइस स्टूडियो के लिए सबसे पहले दुकान चाहिए है, यह देख रहे हैं।- सुधीर कुमार, उपायुक्त उद्योग
