Kanpur: मोदी के दौरे से गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ की मांग ने जोर पकड़ा, श्रीमद्भगवतगीता आयोजन समिति प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेगी
कानपुर में श्रीमद्भगवतगीता आयोजन समिति प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेगी।
कानपुर में श्रीमद्भगवतगीता आयोजन समिति प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजेगी। मोदी के दौरे से गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ की मांग ने जोर पकड़ा है। अगस्त 2022 में केंद्र सरकार ने तेजी दिखायी थी।
कानपुर, अमृत विचार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गीताप्रेस गोरखपुर के शताब्दीवर्ष के कार्यक्रम में जाना श्रीमद्भगवतगीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग को बल प्रदान कर गया। श्रीमद्भगवतगीता आयोजन समिति शनिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय को ज्ञापन मेल से भेजेगी जिसमें गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किए जाने की मांग की जाएगी। यही नहीं सवाल भी उठाया जाएगा कि बीते साल इस दिशा में जो तेजी दिखी थी वह धीमें क्यों पड़ गयी। समिति ने गीता को पाठ्यक्रम में जोड़ने की भी मांग उठायी है।
समिति के दक्षिण कानपुर के संरक्षक भूपेश अवस्थी ने बताया कि कानपुर में बीते एक साल गीता स्वध्याय पर आंदोलन चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य घर-घर गीता वितरित कर लोगों को स्वध्यायी बनाना है। कई किलोमीटर की मानव श्रृंखला, और ग्रीनपार्क में गीता पर ऐतिहासिक सम्मेलन लोगों का इस पवित्र ग्रंथ के प्रति रुझान झलकाता है।
समिति के संयोजक डॉ.उमेश पालीवाल का कहना है कि इसका दायरा कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के दस जिलों में तक फैल गया है। अब और आगे भी बढ़ाया जा रहा है संघ परिवार के संगठन में इसमें जुड़ गए हैं। कानूनविद बताते हैं कि प्रिवेंशन ऑफ़ इंसल्ट टू नैशनल ऑनर एक्ट, 1971 में एक बिल लाकर संशोधन करना पड़ेगा। इसमें राष्ट्रीय कैलेंडर, राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय झंडा वग़ैरह से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। गीता आंदोलन से जुड़े मनीषियों का कहना है कि रायमशविरा के बाद सरकार संशोधन विधेयक ला सकती है।

भूपेश अवस्थी

डॉ उमेश पालीवाल
गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किए जाने पर केंद्र सरकार बड़ी संजीदगी से विचार कर रही है। इसके लिए अलग- अलग मंत्रालयों से राय ली गयी है। महाराष्ट्र से भाजपा के सांसद गोपाल शेट्टी के भेजे एक पत्र के आधार पर इस दिशा में बढ़ी है। शेट्टी ने पांच जुलाई 2022 को पत्र लिखा था जिसमें गृहमंत्री से श्रीमद्भागवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग की थी।
गृहमंत्री शाह ने 18 जुलाई को ही इस पत्र का जवाब भेजा था। तत्कालीन अवर सचिव ( समन्वय-1) रेनू सूरी ने एक अगस्त 2022 को एक कार्यालय ज्ञापन में इसके बारे में जानकारी दी कि सांसद गोपाल शेट्टी के पत्र पर जरूरी कार्यवाही के लिए उसे संबंधित मंत्रालयों में प्रेषित करने का निर्देश दिया गया है।
गृह मंत्रालय ने शिक्षा मंत्रालय से भी राय मांगी है। शिक्षा मंत्रालय ने 10 अगस्त 2022 को श्रीमद्भागवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराए जाने के संदर्भ में अपनी टिप्पणी भी भेजी है। गृह मंत्रालय ने संस्कृति मंत्रालय से श्रीमद्भागवतगीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराए जाने के संदर्भ राय मांगी है। दोनों मंत्रालयों की टिप्पणी की बाबत जानकारी नहीं मिल सकी।
गीताप्रेस से ही 16.21 करोड़ गीता छप चुकी है
सनातन धर्म को बीते सौ वर्षों से प्रमोट करने वाला गीता प्रेस गोरखपुर 16.21 करोड़ श्रीमद्भगवत गीता छापकर बिक्री कर चुका है।इसके अलावा न जाने कितनी संस्थाओं ने गीता के श्लोकों और टीका पर पुस्तकें छपवायी हैं। चिन्मय मिशन और इस्कॉन की गीता भी अभिजात्य वर्ग के घरों में देखी जा सकती है। गीता के बाद पौने 12 करोड़ रामचरितमानस अब तक गीता प्रेस में छप चुकी हैं।
