टैक्स चोरी: बिजली विभाग में फाल्ट, आरटीओ को झटका...जानिए पूरा मामला
अनधिकृत गाड़ियों को विभाग में अनुबंध पर चला रहे हैं अफसर
बरेली, अमृत विचार। बिजली विभाग में अफसर अनधिकृत गाड़ियों को अनुबंध पर चला रहे हैं। टैक्सी परमिट न होने की वजह से इन गाड़ियों के मालिक हर महीने लाखों की टैक्स चोरी कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर लग्जरी कारें हैं जो विभाग के ठेकेदारों की ही हैं जो अफसरों से साठगांठ से ही अनुबंध पर लगी हैं। इसी कारण जरूरी मानकों की अनदेखी कर दी गई है।
बिजली विभाग में अफसरों के लिए बिना टैक्सी परमिट के ही निजी गाड़ियां अनुबंधित की गई हैं। इनमें शहरी क्षेत्र के अधीक्षण अभियंता विकास सिंघल और ग्रामीण क्षेत्र के अधीक्षण अभियंता अशोक चौरसिया के साथ कई और अधिकारी शामिल हैं। लंबे समय से चल रहे इस खेल में हर महीने लाखों की टैक्स चोरी हो रही है। जिन लोगों की गाड़ियां अनुबंधित हैं, वे विभाग के ही ठेकेदार या अफसरों के चहेते हैं। इसी कारण टैक्सी परमिट की बाध्यता उन पर लागू नहीं की गई है।
व्यावसायिक गाड़ियों को देना होता है तिमाही रोड टैक्स
व्यावसायिक वाहन के तौर पर नॉन एसी वाहनों को 660 रुपये सीट के दर से हर तिमाही रोड टैक्स देना पड़ता है जबकि एसी वाहनों पर 990 रुपये का टैक्स होता है। ड्राइवर सीट का टैक्स नहीं लगता। अगर किसी वाहन का अवैध रूप से व्यावसायिक प्रयोग होते पाया जाता है तो उस पर एमवी एक्ट की धारा 207 के तहत कार्रवाई की जाती है।
डीजल-पेट्रोल के साथ हर महीने 22 हजार
बिजली विभाग में एक गाड़ी का करीब 22 हजार रुपये प्रतिमाह किराया अदा किया जाता है। डीजल, पेट्रोल और गैस का खर्च भी विभाग देता है। ये शिकायतें आम हैं कि सरकारी काम के लिए अनुबंधित इन गाड़ियों का जमकर निजी इस्तेमाल होता है। अक्सर अफसरों के परिवार भी इन्हीं में सैर करते दिखते हैं।
गाड़ियों का व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है तो टैक्सी परमिट होना चाहिए। अगर किसी विभाग में इस तरह अधिकारी नाजायज ढंग से गाड़ियां चला रहे हैं तो चेकिंग कराकर कार्रवाई की जाएगी--- संदीप जायसवाल, एआरटीओ प्रवर्तन।
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