अयोध्या: अब पशु होंगे बीमार तो डॉक्टर झटपट पहुचेंगे आपके द्वार, 1962 करें डायल
अयोध्या, अमृत विचार। अब बीमार व घायल पशु को पशु चिकित्सालय ले जाने की जरूरत नहीं है। आपके एक फोन पर मोबाइल वेटरनरी वैन आपके दरवाजे पर होगी। वैन से पशु चिकित्सक आपके घर पहुंचेंगे और निशुल्क इलाज करेंगे। बीमार पशु व जानवरों को दवाएं भी निशुल्क दी जाएगी। इसके लिए सिर्फ आपको विभाग के एक टोल फ्री नम्बर पर कॉल करना है।
प्रदेश सरकार ने 108 एंबुलेंस की तर्ज पर मोबाइल वेटरनरी वैन की भी शुरुआत की है, जिसके जरिये बीमार व घायल पशुओं का इलाज करने के पशु चिकित्सक खुद आपके घर पहुंच जाएंगे। मई में शुरू हुई इस योजना के बाद जनपद में छह मोबाइल वैन काम कर रही है। इस वैन के लिए टोल फ्री नम्बर 1962 जारी किया गया है।
जरूरतमंद व्यक्ति इस टोल फ्री नम्बर पर फोन करेगा। फोन लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम में रिसीव होगा। वहां आपकी शिकायत दर्ज होने के बाद जनपद में वेटरनरी वैन यूनिट को सूचना दी जाएगी। इसके बाद वैन संबंधित शिकायत स्थल पर पहुंच जाएगी। इस दौरान पशु चिकित्सक मवेशी का इलाज करेंगे और सरकार की ओर से जारी की गईं दवाएं भी निशुल्क उपलब्ध कराएंगे। जटिल रूप से बीमार पशुओं को परहेज से संबंधित सलाह भी देंगे।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जगदीश सिंह ने बताया कि दो माह पहले शुरू हुई इस योजना से उन पशुपालकों को सहूलियत मिल जाएगी, जो चिकित्सालय से काफी दूर रहते हैं और लोगों की सलाह पर पशुओं को दवाएं दे देते हैं। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत छोटे पशुओं से लेकर हाथी तक का इलाज हो सकेगा।
डॉ. जगदीश ने यह अपील करते हुए कहा है की बहुत से लोग छोटी सी बीमारी होने पर ही वैन बुलाने की मांग करते हैं। ऐसे में लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। कभी-कभी देखा जाता है कि ऐसी कॉल पर गंभीर पशु लाइन में ही रह जाते हैं और उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल जाता है।
नहीं ढीली करनी पड़ेंगी जेबें
जनपद में बहुत से लोग डॉग या कैट लवर भी होते हैं। ऐसे लोग कुत्ते, बिल्लियों जैसे अन्य घरेलू पशु पालते भी हैं। मोबाइल वेटरनरी वैन शुरू होने के बाद उन्हें निजी चिकित्सक के यहां मोटी फीस नहीं देनी पड़ेगी। घर बैठे ही उनके जानवरों की जटिल बीमारी का उपचार हो जाएगा।
वैन में चिकित्सक समेत रहेंगे तीन लोग
मोबाइल वेटरनरी वैन में तीन लोग मौजूद रहेंगे। पशु चिकित्सक के अलावा एक हेल्पर और ड्राइवर भी मौजूद रहेगा। इस वैन को शुरू करने का मकसद ही यही है कि बीमार पशुओं का झटपट इलाज किया जा सके।
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