प्रयागराज : मलियाना नरसंहार मामले में जिला अदालत का रिकॉर्ड तलब
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मलियाना नरसंहार मामले में 39 आरोपियों को बरी करने के फैसले के खिलाफ एक अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड तीन महीने के भीतर तलब किया है। न्यायालय ने प्रतिवादी पक्षों को नोटिस भी जारी किया है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति नंद प्रभा शुक्ला की खंडपीठ ने वकील अहमद व दो अन्य की आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
दरअसल 1987 में, मेरठ के हाशिमपुरा इलाके में नरसंहार के बाद एक भीड़, जिसमें कथित तौर पर उत्तर प्रदेश प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) के जवान शामिल थे। उस सशस्त्र भीड़ ने केंद्र से लगभग 10 किमी पश्चिम में स्थित गांव मलियाना में हमला किया और कस्बे के कई लोगों की हत्या कर दी। कथित तौर पर पीएसी कर्मियों ने अपनी हिरासत में कम से कम 38 मुसलमानों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में 16 पूर्व पीएसी कर्मियों को अक्टूबर 2018 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने "लक्षित हत्या" के लिए आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई थी। उक्त मामले से संबंधित नरसंहार के पीड़ित रईस अहमद द्वारा मई माह में दाखिल एक अन्य अपील में बताया गया कि जिला अदालत के आदेश से यह स्पष्ट है कि मामले को उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया, जितनी जरूरत थी।
ट्रायल कोर्ट ने फैसले में कहा कि मृत व्यक्तियों के पोस्टमॉर्टम की मूल प्रतियां और साथ ही घायल व्यक्तियों की मेडिकल रिपोर्ट अदालत के सामने नहीं रखी गईं और केवल फोटोकॉपी ही रिकॉर्ड पर थीं जो प्रमाण के तौर पर स्वीकार्य नहीं थीं।
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