बरेली: स्मार्ट सिटी में 156 रुपये का वार्षिक टैक्स लगाकर निगम को कंगाल बनाने में जुटे अफसर
सुरेश पाण्डेय, बरेली, अमृत विचार। नगर निगम की आय बढ़ाने में उसके कर्मी और अफसर ही बाधा बन रहे हैं। वह न सिर्फ संपत्ति कर वसूलने में ढिलाई बरत रहे हैं बल्कि व्यावसायिक संपत्ति पर कम कर लगा होने पर उसे बढ़ाने में अपने पद के अनुरूप काम भी नहीं कर रहे हैं। हैरानी की बात है कि स्मार्ट सिटी वार्ड में ही व्यावसायिक संपत्ति से मात्र 156 रुपये का कर निगम में जमा कराया जा रहा है। टैक्स विभाग के जिम्मेदार जानते हुए भी निगम को कंगाल बनाने में जुटे हैं।
निगम में राजस्व निरीक्षक का काम है कि वह क्षेत्र में घूमकर टैक्स का असेसमेंट करे। संपत्ति पर कर ज्यादा या कम है तो उसका प्रस्ताव बनाकर भेजें। वहीं, टीसी का काम है कि वह डोर टू डोर कर का कलेक्शन करें। जमीनी स्तर पर उसे पता होता है कि वह कितने बड़े भवन का कितना टैक्स वसूल कर निगम खाते में जमा कर रहा है, मगर जिम्मेदारी से काम हो तो निगम की आय बढ़े, लेकिन निजी हितों और लापरवाही के चलते ऐसा नहीं हो पा रहा है।
स्मार्ट सिटी वार्ड 64 के सिकलापुर जोन- 2 में सड़क पर एक संपत्ति है। इसकी आईडी 047498 है। इसमें गोदाम, कार्यालय चल रहे हैं। कागजों में इसे आवासीय दर्शाया गया है। लगभग 200 स्क्वायर मीटर की तीन मंजिला इस संपत्ति पर वर्ष 2023-24 का बिल 156.86 रुपये दर्शाया गया है। ऐसा नहीं है कि यह भूलवश हुआ है। निगम में कर निर्धारण अधिकारी, टैक्स अधीक्षक, राजस्व निरीक्षक और टीसी की लापरवाही इसमें जाहिर हो रही है, क्योंकि इस संपत्ति पर वर्ष 2018 से कम टैक्स लगाया गया है।
वर्ष 2018-19 में 184 रुपये, 2019-20 में 207.13 रुपये, 2020-21 में 232 रुपये टैक्स था। व्यावसायिक संपत्ति पर लगे सबसे कम टैक्स को भी हर साल नहीं देकर 18 फरवरी 21 में तीन साल का 858.07 रुपये टैक्स जमा किया गया था। मई 2021 से 156.86 रुपये का टैक्स आवंटी निगम को देता आ रहा है। यह जमा भी होता रहा है। इस बार भी यही बिल दिया गया है। टैक्स विभाग के जिम्मेदार निगम हित के बारे में काम करते तो वर्ष 2018 से चली आ रही टैक्स की यह गड़बड़ी सामने आती और निगम को राजस्व हानि नहीं होती।
इस तरह की गड़बड़ी सामने आने पर प्रकरण की जांच कराएंगे। कुछ मामलों में जांच चल भी रही है।-निधि गुप्ता वत्स, नगर आयुक्त
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