बरेली: कूड़ा उठाने के नाम पर मलाई काट रहे ठेकेदार, लाखों का खेल
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में कूड़े के नाम पर मलाई खाने का सिलसिला जारी है। ठेकेदार का काम नगर निगम के वाहनों से किया जा रहा है। इन वाहनों में सरकारी खर्चे से डीजल डाला जा रहा है। इससे रोजाना 200 लीटर डीजल की चपत सरकारी खजाने को लग रही है। वार्डों से कूड़ा …
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम में कूड़े के नाम पर मलाई खाने का सिलसिला जारी है। ठेकेदार का काम नगर निगम के वाहनों से किया जा रहा है। इन वाहनों में सरकारी खर्चे से डीजल डाला जा रहा है। इससे रोजाना 200 लीटर डीजल की चपत सरकारी खजाने को लग रही है।
वार्डों से कूड़ा उठाने के लिए चार ठेकेदारों को जिम्मेदारी दी गई है। नियम के अनुसार ठेकेदार को अपने वाहन से कूड़े को डंपिंग ग्रांउड तक पहुंचाना होता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो शहर के कुल 80 वार्डों में कूड़ा उठाने के लिए करीब 63 छोटा हाथी वाहनों को लगाया गया है। निगम की तरफ से प्रतिदिन एक गाड़ी को तीन से पांच लीटर तेल दिया जाता है।
इन वाहनों का उपयोग ठेकेदार कर कर रहे हैं। वाहनों को चलाने के लिए ठेकेदारों ने आउटसोर्सिंग के जरिए चालक रखे हैं। निगम के वाहनों के लिए हर माह करीब साढ़े चार लाख के डीजल का भुगतान नगर निगम अपने खाते से कर रहा है। बावजूद इसके कूड़े को डलाव घर या अन्य खाली जगहों व हाईवों के किनारे पर फेंक दिया जा रहा है। विभागीय मिलीभगत से यह खेल खेला जा रहा है इसलिए अधिकारी भी खामोश हैं।
खाते से निकाल रहे पूरा, दे रहे आधा वेतन
कूड़ा उठाने के नाम पर डीजल और वाहन का ही खेल नहीं है घोटाला और भी है। आउटसोर्सिंग से 300 कर्मचारियों को सफाई व्यवस्था में लगाया गया है। नियुक्ति के समय इनको 16 हजार रुपये देने की बात कही गई थी। सूत्रों की मानें तो निगम के खाते से पूरा वेतन निकाला जा रहा है जबकि इन लोगों को सात से आठ हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं हर माह वेतन न देकर दो से तीन माह बाद वेतन दिया जा रहा है।
