Fatehpur: बढ़ता बाढ़ का खतरा, पांडु नदी भी उफान पर, कटरी के पास में रहने वाले लोगों की बढ़ी धड़कनें
फतेहपुर में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।
फतेहपुर में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। पांडु नदी भी धीरे धीरे जिंदादिल कटरी में खतरे की घंटी बजा रही है। गंगा व पांडु नदी के बीच बसी कटरी में हर साल तबाही आती है।
फतेहपुर, अमृत विचार। गंगा व पांडु नदी के बीच बसी कटरी पर बाढ़ का असर दिखने लगा है। पांडु नदी का भी है। गंगा की कटान बिंदकी फारम साइड में इतनी हो चुकी है कि लगभग 40 से 50 बीघा जमीन धारा के उस पार उन्नाव जिले की तरफ चली गई है।
गंगा व पांडु नदी के बीच 13 गांव बसे हैं। हर साल बाढ़ के दौरान इन गांवो में तबाही का मंजर नजर आता है। जो फिर से मंडराता दिख रहा है। जिस तरह से गंगा का पानी बढ़ रहा है उससे एक दो दिन में हालात खराब हो सकते हैं। यह दीगर बात है कि बाढ़ की तबाही का सामना करने की आदी कटरी की जिंदगी में कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा है।
यही कारण है कि कटरी के लोग, बाढ़ को लेकर चिंतित तो हैं लेकिन खौफजदा कतई नहीं। ऐसा इसलिए भी है क्येाकि कटरी की जिंदगी को प्रशासनिक इंतजामात पर पूरा भरोसा है। बिन्दकी एसडीएम मनीष कुमार की टीम ने अब तक कई बार कटरी क्षेत्र का निरीक्षण किया जा चुका है। प्रशासनिक अफसर ने ग्रामीणों से सीधे रुबरू होकर उनकी समस्या जानी और हरेक तरह से उन्हें सुरक्षित व संरक्षित रखने का विश्वास कटरी के लोगों के लिए संजीवनी बूटी साबित हो रहा है।
फिर पहुंचे एसडीएम, जाना कटरी का हाल
औंग तहसील बिन्दकी प्रशासन लगातार कटरी के गावों में बाढ़ को लेकर निगरानी की जा रही है। बुधवार को डीएम श्रुति के संभावित बाढ़ क्षेत्र जाड़े का पुरवा, बिन्दकी फारम कटरी क्षेत्र का निरीक्षण किए जाने की सूचना से कई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी यहां की सलामती को लेकर सक्रिय दिखाई दिखे। एसडीएम बिन्दकी सहित स्वास्थ्य विभाग व सिंचाई विभाग के अधिकारी व करचारियों की चहलकदमी देखी गई। एसडीएम मनीष कुमार ने बाढ़ से निपटने के तरीके और जरूरतमंद सामग्री की आवश्यकता को पूरा करने के लिए ग्रामीणों को आश्वस्त किया।
बाढ़ कब आ जाए, पता नहीं चल पाता
औंग हर साल बाढ़ से जूझने वाले जाड़े का पुरवा निवासी रामखेलावन ने बताया है कि गंगा का पानी बिलकुल गांव के लेबल पर आ चुका है। जिससे कब गांव बाढ़ की चपेट में आ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। कटरी के लोग बाढ़ के नाम पर घबराते तो हैं किन्तु उनके जबरदस्त साहस के आगे बाढ़ की समस्या बौनी हो जाती है ।
फसलों के रूप में पानी में बह जाते अन्नदाता के अरमान
बिन्दकी फारम कटरी के रहने वाले गोविन्द का कहना है कि जब अचानक गंगा का पानी प्रलय बनकर प्रहार करता है। तब सबसे पहले परिवार और मवेशियों को सुरक्षित करना पड़ता है। तब तक घरों में रखा रोजमर्रा का उपयोग करने वाला तथा खाद्य सामग्री पानी में बह जाती है। अब तो गांव और गंगा के बहाव का लेबल एक है। ऐसे में कब गंगा में गांव नजर आने लगे। इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
