बरेली: क्योंकि मजदूरों जैसा था वेतन! आठ साल में 31 हजार को नौकरी...आठ हजार ने छोड़ दी

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अनुपम सिंह, बरेली, अमृत विचार। पढ़ाई-लिखाई पर उम्र के तमाम साल और मां बाप के लाखों फूंकने के बाद सरकारी नौकरी पाने का सपना तो पूरा नहीं हो सका। रोजगार मेलों के जरिए जैसे-तैसे प्राइवेट नौकरियां युवाओं के हाथ लगीं, लेकिन वे भी जीवनयापन का जरिया नहीं बन पाईं। आठ सालों में करीब 31 हजार युवाओं को नौकरी तो जरूर मिलीं, पर बेहिसाब काम के बावजूद मजदूरों जैसा वेतन होने के साथ कई और कारणों से करीब आठ हजार युवाओं ने नौकरियां छोड़ दी।

कहने को रोजगार मेलों के जरिए बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए सरकार की ओर से लगातार कोशिशें की जा रहीं हैं। इसके लिए हर माह रोजगार मेले आयोजित हो रहे हैं। प्रतिवर्ष सरकार रोजगार मेले का लक्ष्य दे रही है, लेकिन नतीजे बेहतर नहीं कह सकते हैं। नौकरियां ऐसी हैं कि युवाओं के जीवनयापन का जरिया नहीं बन पा रही हैं। कंपनियां अपने वादे भी पूरे नहीं कर रही हैं। इसलिए तमाम युवा उन्हें कुछ ही महीनों बाद छोड़ दे रहे हैं। नौकरी से किनारा करने की कई और भी अलग-अलग वजहें निकलकर सामने आई हैं। पिछले आठ साल में करीब आठ हजार युवाओं ने रोजगार मेले में मिली नौकरी को बाय-बाय कर दिया है।

बरेली में हर 41वां शख्स है बेरोजगार
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इकलौते मंडल के बरेली जिले में 83 हजार 229 बेरोजगार हैं। यह तो वे आंकड़े हैं, जाे विभाग के पोर्टल पर प्रदर्शित हो रहे हैं, जबकि इसके इतर बेरोजगार युवाओं के आंकड़े भयावह हैं। औसतन, बरेली का हर 41वां शख्स बेरोजगार है। सबसे ज्यादा संख्या 18 से 35 साल के नौजवानों की है।

इधर मिला रोजगार, उधर फिर बेरोजगार
पिछले आठ साल में सरकार ने 121 रोजगार मेले लगाने का लक्ष्य जिले को दिया। इसके सापेक्ष जिले में 157 रोजगार मेले लगाए गए। इसमें 108,70 युवाओं ने प्रतिभाग किया। इसके बाद इंटरव्यू कर निजी कंपनियों ने इन आठ सालों में 31,570 लोगों को नौकरियां दी, लेकिन बेरोजगार घूम रहे युवाओं के हाथ में लंबे समय तक नौकरियां टिक नहीं सकी। जानकारों की माने तो आठ सालों में करीब 25 फीसदी ने नौकरी छोड़ दी। इस हिसाब से अलग-अलग वजहों से लगभग 7892 युवाओं ने नौकरी से दूरी बना ली है।

घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर नौकरी, वेतन भी नाममात्र का
आठ साल में हजारों युवाओं की ओर से नौकरी से दूरी बनाने की कई वजहें सामने आईं हैं। एक मुख्य वजह नौकरी घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर मिलने से युवाओं को दिक्कतें आ रहीं थीं। लंबी दूरी के हिसाब से कम वेतन भी एक बड़ी वजह बना। इसके अलावा पारिवारिक कारणों की वजहों से भी काफी संख्या में लोगों ने नौकरी छोड़ी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने से नौकरी बाधा बनने पर छोड़ दी गई।

वर्षवार रोजगार मेले और नौकरियां
वर्ष              मेले का लक्ष्य           लगे रोजगार मेले              प्रतिभाग         मिली नौकरी

2015-16        12                             12                            3103          657
2016-17        12                             12                           2348           509
2017-18        15                             16                           6821           2657
2018-19        15                             12                          29179          4749
2019-20        16                              21                          6733           2769
2020-21        18                              33                         23281          8041
2021-22        19                              23                        16212          5387
2022-23        14                              28                         18576          6801

रैंडम जांच में पता लगे नोकरी छोड़ने के कारण
पहले नौकरी छोड़ने की वजह क्या रहती थी, इसका पता नहीं चल पाता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से सरकार ने नौकरी छोड़ने वालों में से 10 प्रतिशत युवाओं से रैंडम बात कर वजह जानने के आदेश दिए हैं। इसके बाद से रोजगार मेलों में नौकरी के लिए चयनित हुए अभ्यर्थियों से बात करने पर वजह सामने आ सकी। यह नौकरी छोड़ने वाले युवाओं की संख्या में 10 प्रतिशत से बातचीत के आधार पर है।

केस-1
शहर में ही रहने वाली नेहा मिश्रा का कहना है दो साल पहले उन्हें रोजगार मेले से नौकरी मिली थी। गुड़गांव की कंपनी थी। कई बार नौकरी पर जाने के लिए सोचा, लेकिन घर से दूरी अधिक होने और पैसा कम होने की वजह से नहीं जा सकी।

केस-2
बहेड़ी क्षेत्र के रहने वाले अमित कुमार ने बताया कि रुद्रपुर की कंपनी ने जॉब दी थी। काम ज्यादा था। उस हिसाब से वेतन नहीं मिल रहा था। कई बार कहने के बाद भी कंपनी ने पैसा नहीं बढ़ाया। छह माह तक काम किया। फिर छोड़ दिया था। अब अपना जनसेवा केंद्र चला रहे हैं।

लोगों को रोजगार देने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। रोजगार मेले से काफी संख्या में नौकरी पाने वाले बेहतर कार्य कर रहे हैं। अलग-अलग वजहों से 20 से 25 फीसदी युवा नौकरी छोड़ दे रहे हैं। कोई भी क्षेत्र हो, हर जगह थोड़ी-बहुत तो दिक्कतें आती ही हैं।-त्रिभुवन सिंह, सहायक निदेशक सेवायोजन बरेली मंडल

15 रोजगार मेले लगाने का लक्ष्य आया है इस बार
04 रोजगार मेले लगाए जा चुके हैं जून तक
2457 लोगों ने मेले में प्रतिभाग किया है जून तक
765 युवाओं का नौकरी के लिए चयन हुआ है जून तक

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