बरेली: इतने ज्यादा एसडीएम हो गए... तैनाती को नई व्यवस्था बनानी पड़ी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। प्रशासनिक व्यवस्था भी कमाल की है। कलेक्ट्रेट और तहसीलों में लिपिकों के 70 के करीब पद खाली चल रहे हैं। एक लिपिक दो से तीन पटलों का कामकाज देख रहा है। वहीं एसडीएम रैंक के इतने अफसर बरेली में भेज दिए गए कि उनकी तैनाती करने के लिए नई व्यवस्था बनानी पड़ गई। शासन से कई डिप्टी कलेक्टर अतिरिक्त बरेली भेजे गए हैं। इनसे कामकाज कराने के लिए जिलाधिकारी को डिप्टी कलेक्टर प्रथम और डिप्टी कलेक्टर द्वितीय बरेली नाम से अस्थाई पद की अलग व्यवस्था बनानी पड़ी।

जिलाधिकारी शिवाकान्त द्विवेदी ने डिप्टी कलेक्टर प्रथम शिल्पा ऐरन को बनाया है। कार्य विभाजन के तहत उन्हें कनिष्ठ प्रभार शत्रु संपत्ति एवं निष्क्रांत संपत्ति, मीटिंग और तहसील दिवस, नजारत, आम आदमी बीमा योजना, संग्रह अनुभाग, राजनैतिक पेंशन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कनिष्ठ प्रभार संयुक्त कार्यालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

जबकि डिप्टी कलेक्टर द्वितीय सुभाष सिंह को कनिष्ठ प्रभार ग्रामीण सीलिंग, किराया औचित्य प्रमाणपत्र, कृषक दुर्घटना बीमा योजना, भूलेख अधिष्ठान के लेखपालों एवं चैनमैनों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही में अपील एवं प्रत्यावेदनों का निस्तारण करना, कनिष्ठ प्रभार नागरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी हैं। डीएम ने एक दूसरे को डिप्टी कलेक्टर प्रथम व द्वितीय का लिंक अफसर भी नियुक्त किया है। वहीं, अपर उप जिलाधिकारी सदर के पद पर देश दीपक तैनात हैं।

अपर नगर मजिस्ट्रेट के प्रथम, द्वितीय और तृतीय पद हैं
अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम, द्वितीय और तृतीय पद भी अस्थायी हैं। इन पदों पर भी डिप्टी कलेक्टरों की तैनाती की जाती है। वर्तमान में अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम) प्रथम नहने राम हैं और इनके अंडर में बारादरी और इज्जतनगर थाना क्षेत्र, अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय राजीव शुक्ला के अंडर में सुभाषनगर और किला थाना क्षेत्र और अपर नगर मजिस्ट्रेट तृतीय अनिल कुमार यादव को सीबीगंज और कैंट थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी है। इन थाना क्षेत्रों की कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने से लेकर तमाम वाद और शिकायतें भी इन्हीं अधिकारियों की कोर्ट में सुनी जाती हैं। इनके क्षेत्रों में नगर मजिस्ट्रेट का हस्तक्षेप नहीं है।

नगर मजिस्ट्रेट के पास से घटा शहरी क्षेत्र
कहने को नगर मजिस्ट्रेट हैं, लेकिन इनके पास शहरी क्षेत्र का हिस्सा महज दो ही थाने का है। नगर मजिस्ट्रेट रेनू सिंह के पास कोतवाली और प्रेमनगर थाना क्षेत्र है। इन थाना क्षेत्रों की कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने के साथ शांतिभंग समेत अन्य मामलों के वाद की सुनवाई नगर मजिस्ट्रेट की कोर्ट में होती है। पहले नगर मजिस्ट्रेट के पास पूरे शहर की जिम्मेदारी होती थी, लेकिन अब शहरी क्षेत्र काफी घट गया। एक दो नगर मजिस्ट्रेट के कार्यकाल तक नगर मजिस्ट्रेट के पास विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय की बागडोर भी रही थी।

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