अयोध्या: कर्बला वाकया नहीं इंसानियत की है दर्सगाह - मौलाना जफर

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Edited By Ankit Yadav
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अमृत विचार, अयोध्या। कर्बला कोई वाकया नहीं बल्कि इंसानियत की दर्सगाह है। कर्बला में हक और बातिल के बीच हुई जंग में हक की जीत शहादत देकर हुई है। यही वजह है कि जिस शिद्दत से मुस्लिम मोहर्रम मनाते हैं वहीं हिन्दू समाज के लोग भी पूरी आस्था रखते हैं।

यह बात मौलाना जफर अब्बास कुम्मी ने शुक्रवार रात ऐतिहासिक चौक मस्जिद में चल रही सिलसिले की मजलिस के दौरान कही। उन्होंने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने 72 जानिसार साथियों के साथ शहादत देकर इस्लाम और इंसानियत को ता - कयामत तक जिंदा कर दिया। मौलाना ने कहा कि यजीद बुराइयों और बदकारियों का प्रतीक था। उसने उस दौर में इस्लाम के उसूलों के खिलाफ जाकर अपनी बादशाहत चलानी चाही।

मौलाना ने कहा कि नवासे रसूल हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने उसके उस दौर के आतंकवाद को कबूल नहीं किया और न ही उसकी बैयत की। मौलाना ने कहा कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके कुनबे व उनके साथ गए सहाबियों पर जुल्मों सितम की इंतेहा की गई। यहां तक की पानी तक बंद कर दिया गया। इस जुल्म के बाद भी हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने उसकी बैयत नहीं कबूल की और शहीद हो जाना बेहतर समझा। मौलाना ने कहा कि इस्लाम आतंकवाद नहीं बल्कि इंसानियत को मानने वाला मजहब है। 

मौलाना ने कहा कि आज पूरी दुनिया मोहर्रम मनाती है लेकिन कोई यजीद को याद नहीं करता है। यजीद जिंदा रह कर भी मर गया और हजरत इमाम हुसैन शहादत देकर आज भी जिंदा हैं। मजलिस के दौरान शिया सोगवार मौजूद रहे। चौक मस्जिद के अतिरिक्त गुलाबबाड़ी के इमामबाड़े, मकबरा बहू बेगम समेत अन्य स्थानों पर सिलसिले की मजलिसें चल रहीं हैं।

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