Fatehpur में बढ़ती गंगा से कटरीवासियों की बढ़नी लगी दिल की धड़कनें, रबी की फसल में भी लगेगा झटका
फतेहपुर में बढ़ती गंगा से कटरीवासियों की मुश्किलें बढ़ी।
फतेहपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कटरीवासियों की दिल की धड़कनें बढ़ने लगी है। गंगा के जलस्तर में सात सेंटीमीटर का इजाफा हुआ है।
फतेहपुर, अमृत विचार। विभिन्न बैराज से छोड़े जा रहे पानी से गंगा की जलधारा कटरी में दहशत का पर्याय बनती जा रही है। जबकि यमुना में पानी कम होने से तिरहार की जिंदगी में फिलहाल राहत दिख रही है। मंगलवार को गंगा के जलस्तर में सात सेंटीमीटर का और इजाफा हो गया। वहीं यमुना में 58 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।
सोमवार को गंगा का जलस्तर 100.490 मीटर रहा। मंगलवार की सुबह छह बजे यह 100.580 मीटर रिकार्ड किया गया। शाम सात बजे की रिपोर्ट में यह बढ़कर 100.560 मीटर हो गया। इस तरह से 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में सात सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।
यमुना नदी का जलस्तर सोमवार 89.90 मीटर रहा। जिसमें मंगलवार को और कमी आई। सुबह छह बजे यह 89.42 मीटर पर था जो शाम घटकर 89.22 मीटर रह गया। इस तरह से कालिंदी का जलस्तर 24 घंटे में 58 सेंटीमीटर घट गया।
बढ़ती गंगा से बढ़ने लगी दिल की धड़कन
गंगा की बाढ़ को लेकर बरकरार आशंका के कारण पहले सब्जी की फसल के उत्पादन में ब्रेक लगी तो अब खरीफ की प्रमुख फसल धान की खेती पर ग्रहण लग रहा है। जिससे कटरी क्षेत्र में बाढ़ की आशंका से किसानों की बेचैनी भी बढ़ चली है। हाल यह है कि मल्हूखेड़ा के किसानों के खेत खाली पड़े है।
सब्जी की फसल गई धान में लग रहा ग्रहण
उफनाती गंगा का रूप देखकर कटरी के किसानों में खतरे की सिरहन दौड़ गई है। इसकी गवाही खेत दे रहे हैं। खरीफ की फसल के दौरान किसानों के जेहन में समाए डर की हकीकत देखते बन रही है। जहां बाढ़ के डर से सब्जी, तिलहन, दलहन की फसल बोने की यहां के अन्नदाता हिम्मत नहीं जुटा सके हैं। धान की फसल का भी ऐसे हालात के कारण अता पता नहीं चल पा रहा है। जाड़े का पुरवा के बाद मल्लूखेड़ा में भी बाढ़ का खतरा साफ देखा जा सकता है। जाड़े का पुरवा के किसान राम खेलावन का कहना है कि मौजूदा हालातों से खेती करने की हिम्मत जवाब दे गई है।
रबी की फसल में भी लगेगा झटका
कटरी क्षेत्र में पूरी तरह खरीफ फसल खेतों से गायब होने के बाद रबी की फसल की तैयारी में भी खतरा महसूस हो रहा है। जिस तरह से गंगा का जलस्तर बढ़ता जा रहा है उससे बाढ़ की आशंका कम होने का नाम नहीं ले रही है। यदि यही हाल रहा तो इस क्षेत्र में किसान खेतों को खाली छोड़कर, लागत बचाने का काम करेंगे। वरना बाढ़ आने पर फसल के साथ साथ उनकी लागत व मेहनत पर भी पानी फिर सकता है।
