मुरादाबाद : 28 साल से बदहाल केजीके कॉलेज का तरणताल, चारों ओर फैली है गंदगी और उग रही हैं बड़ी-बड़ी घासें

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अनदेखी : तरणताल में पहले होती थीं राष्ट्रीय और विश्वविद्यालय स्तरीय प्रतियाेगिताएं, कॉलेज संस्थापक साहू शंभूनाथ ने 1960 में कराया था निर्माण

बदहाल स्थिति में केजीके कॉलेज स्थित तरणताल।

मुरादाबाद, अमृत विचार। केदारनाथ गिरधारी लाल खत्री (केजीके) महाविद्यालय महानगर के प्रसिद्ध डिग्री कॉलेज में शामिल है। कॉलेज में एक भवन की छत पर आज से 63 साल पहले स्वीमिंग पूल (तरणताल ) बनाया गया था। इसके बाद से इस कॉलेज की गिनती सूबे के सबसे बड़े कॉलेजों में होने लगी। उस समय यह कॉलेज आगरा विवि से संबद्ध था। हालांकि इस कॉलेज का स्वीमिंग पूल बदहाल स्थिति में पड़ा है। इसकी चारों और गंदगी और बड़ी घास देखने को मिल रही है।

साहू गिरधारी लाल खत्री एवं उनके पुत्र साहू शंभूनाथ ने सन् 1948 में इस डिग्री कॉलेज की स्थापना की थी। कुछ दिनों बाद ही ये कॉलेज लॉ की पढ़ाई के लिए आसपास के जिलों में प्रसिद्ध हो गया। इस कॉलेज में संस्थापक साहू शंभूनाथ ने 1960 में स्वीमिंग पूल का निर्माण कराया। क्षेत्र के लोग सिर्फ ये जानने के लिए इस कॉलेज में आ जाते थे कि स्वीमिंग पूल होता क्या है? प्रसिद्धी का आलम यह था कि आगरा विवि से संबद्ध इस कॉलेज में नेशनल और विश्वविद्यालय स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं कराई जाने लगीं। लेकिन, जैसे-जैसे समय बीता इस स्वीमिंग पूल की स्थिति खराब होने लगी। इसकी देखरेख में कमी आने लगी।

आलम यह रहा कि 35 साल बाद 1995 में पानी के फिल्टरेशन की व्यवस्था न होने और गहराई ज्यादा होने के कारण पूल को बंद कर दिया गया। हालांकि इसके बाद 2004 में इसे दोबारा चालू करने का प्रयास हुआ। लेकिन, सफलता नहीं मिली। प्राचार्य सुनील चौधरी ने बताया कि कुछ मामले में प्रबंधन तैयार नहीं था तो कहीं न कहीं इस बात को लेकर भी सहमति नहीं बनी कि पानी की निकासी कैसे और कहां होगी?  इसी वजह से स्वीमिंग पूल को दोबारा चालू करने के फैसले पर निर्णय नहीं हो सका। आज ये पूल दुर्गति का शिकार हो चुका है। इसकी छत जीर्ण-शीर्ण होने के साथ ही गिरने की स्थिति में है। लगातार काफी समय से देखभाल न होने से पूल में पेड़े-पाैधे उग आए हैं।

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