अनीता प्रकरण : इलाज शुरू करने से पहले मांगे गए थे 10,000 रुपये
हॉस्पिटल के एडमिन सुपरवाइजर ने कहा, सीसी कैमरे की फुटेज 15-20 दिन तक सुरक्षित
मुरादाबाद, अमृत विचार। बीमार अनीता भटनागर मामले में अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की तरफ से कराई गयी जांच ने पूरी स्थिति साफ कर दी है। मामले में संयुक्त निदेशक डॉ. रेखा रानी एवं मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ.नवीन कुमार रस्तोगी की रिपोर्ट यह बात सामने आयी है कि इमरजेंसी में भर्ती होने और इलाज शुरू करने से पहले अनीता के घरवालों से 10,000 रुपये की मांग की गई थी।
रुपये न जमा कर पाने की वजह से अनीता को हॉस्पिटल की इमरजेंसी में इलाज नहीं मिल पाया। इलाज के इंतजार में वह चार-पांच घंटे तक इमरजेंसी में ही लेटी रहीं। बाद में अनीता के पति राजीव भटनागर व बेटा उठाकर ब्राइट स्टार हॉस्पिटल ले गए थे। अधिकारियों ने जांच में अनीता भटनागर और विवेकानंद हॉस्पिटल के एडमिन सुपरवाइजर डॉ. सरोज झा के भी बयान दर्ज किए हैं। अधिकारियों ने डा.सरोज झा से इमरजेंसी की सीसी कैमरे की फुटेज मांगी तो जवाब मिला कि उनके यहां कैमरे की रिकॉर्डिंग 15 से 20 दिन के ही सुरक्षित रखी जाती है। डॉ.सरोज ने जांच अधिकारियों के सवाल पर अस्पताल में रोगियों को दवाओं में 10 से 15 प्रतिशत तक छूट की जानकारी दी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने गूंज सेवा संस्थान के अध्यक्ष सचिन गौतम के 5 अप्रैल के शिकायती पत्र को आधार बनाकर विरुद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत की है। ये जांच रिपोर्ट 22 जुलाई के दिन संयुक्त निदेशक एवं मंडलीय सर्विलांस अधिकारी की तरफ से कार्रवाई के लिए अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को भेजी गई थी।
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अनीता बोलीं, तबीयत बिगड़ने से घबरा गए
जांच अधिकारी रोगी (अनीता भटनागर) से भी मिले थे। बयान में अनीता ने कहा है कि 28 मार्च की सुबह 9:30 बजे इमरजेंसी पहुंची थीं। वहां करीब पांच घंटे लेटी रहीं लेकिन, उन्हें कोई उपचार नहीं दिया गया। स्टॉफ ने उनसे कहा था कि पहले 10,000 रुपये जमा करो तभी इलाज शुरू होगा। पैसे की प्रत्याशा में उनका इलाज शुरू नहीं किया गया। जब उनकी तबियत ज्यादा खराब हो गई तो उन्हें उनके परिजन ब्राइट स्टार अस्पताल ले गए। अनीता ने जांच अधिकारियों को यह भी बयान दिया कि उनका विवेकानंद हॉस्पिटल से कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है लेकिन, उनके साथ बहुत ही अमानवीय किया गया। स्टॉफ ने उनका पैसों के बिना इलाज शुरू तक नहीं किया।
जांच टीम का निष्कर्ष
- अस्पताल प्रबंधन द्वारा चैरिटी में दी जाने वाली छूट या निश्शुल्क सुविधाएं स्पष्ट रूप से प्रचलित नहीं की गईं। जिस कारण रोगी (अनीता भटनागर) और परिजन को भ्रांति हुई एवं रोगी द्वारा फाइल न बनवाने के कारण उसके इलाज में देरी हुई।
- अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी के साथ ही सलाह दी जाए कि भविष्य में अप्रिय स्थिति से बचाव को चिकित्सालय में दी जाने वाली छूट व निश्शुल्क सुविधाओं का उल्लेख करें।
हम विवेकानंद कालेज आफ नर्सिंग एण्ड इंस्टीट्यूट आफ पैरामेडिकल साइंस के निदेशक हैं: डॉ.हरजीत
अमृत विचार में प्रकाशित समाचार अपने उल्लेख को लेकर डॉ.हरजीत सिंह को आपत्ति है। डॉ.हरजीत का कहना है कि हम एशियन विवेकानंद हास्पिटल के निदेशक नहीं है। हम विवेकानंद कालेज आफ नर्सिंग एण्ड इंस्टीट्यूट आफ पैरामेडिकल साइंस के निदेशक हैं। अनीता भटनागर के चिकित्सा मामले से हमारा कुछ भी लेना-देना नहीं है।
यह है संयुक्त जांच रिपोर्ट
- एडीएम प्रशासन एवं सीएमओ द्वारा पत्र मार्क कर भेजा गया था लेकिन, रोगी करीब 4-5 घंटे अस्पताल में रही और उसका इलाज नहीं किया गया।
- एडमिन सुपरवाइजर डॉ.सरोज झा द्वारा अपने बयानों में दर्ज किया गया है कि ट्रस्ट द्वारा अस्पताल में बिस्तर निश्शुल्क है और रोगियों को दवाइयां स्वयं खरीदनी होती हैं। जिस कारण रोगी (अनीता भटनागर) के रिश्तेदार ने दवाइयां खरीदने से मना कर दिया था। इसलिए रोगी के तीमारदार 100 प्रतिशत निश्शुल्क इलाज न मिलने से अपने रोगी को लेकर चले गए थे।
- रोगी (अनीता भटनागर) के तीमारदार को मालूम नहीं था कि ट्रस्ट के अस्पताल में 100 प्रतिशत इलाज/दवाइयां फ्री नहीं होती हैं और न ही अस्पताल के कार्मिकों द्वारा उनकों इस बारे में जानकारी दी गई कि ट्रस्ट द्वारा अस्पताल में रोगी को केवल बिस्तर निश्शुल्क उपलब्ध है।
एशियन विवेकानंद हॉस्पिटल को हमने प्रबंधक के नाम पत्र लिखकर चेताया है कि दोबारा भविष्य में इस तरह की लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई होगी। वैसे रही बात अनीता भटनागर को 4-5 घंटे इमरजेंसी में रोककर उनको इलाज भी न देना, ये तो गलत है ही। इसीलिए अंतिम चेतावनी दी है। हॉस्पिटल की सेवाओं के शुल्क आदि को सार्वजनिक करें। - दिनेश कुमार, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
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