अयोध्या: अब योग्यता के आधार पर होगा वार्षिक तबादला, शासन ने तय की नई नीति
योग्यता के लिए निर्धारित हुई विभिन्न श्रेणियां, अप्रैल तक कवायद पूरी कर लेने की हिदायत
अयोध्या, अमृत विचार। वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया संपन्न होने के साथ प्रदेश शासन अगले वर्ष के वार्षिक स्थानांतरण की कवायद में जुट गया है। इसके लिए शासन की ओर से नई नीति तय की गई है। नीति के तहत अगले वर्ष से वार्षिक तबादला योग्यता के आधार पर होगा।
जिसमें मेरिट और डिमेरिट को समाहित करने के लिए लिए विभिन्न श्रेणियां तय की गई है। योग्यता के आधार पर तबादला के लिए विभागों और निगमों को अप्रैल माह तक वरीयता निर्धारित कर लेने की हिदायत दी गई है। शासन के मुख्य सचिव की ओर से आदेश जारी किया गया है।
गौरतलब है कि शासकीय नीति के मुताबिक विभागीय स्तर पर वर्ष में एक बार कर्मचारियों और अधिकारियों का तबादला किया जाता है। विशेष परिस्थितियों में तबादले का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होता है। नियम के तहत समूह का और ख में 20 फीसदी का एक जनपद में 3 वर्ष तथा मंडल में 7 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद स्थानांतरण अन्यत्र जनपद और मंडल में किया जाता है।
वहीं समूह और घ में 10 फीसदी कर्मचारियों का 3 साल कार्यकाल पूरा होने पर पटल परिवर्तन का नियम है। अमूमन जून माह में कर्मचारी और अधिकारियों के वार्षिक तबादले किए जाते रहे हैं, जिससे जुलाई के प्रथम सप्ताह में सभी अपने नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर लें और विभागीय व शासकीय कार्य सुचार रूप से संपादित होते रहे। वर्ष 2022-23 में सरकार की ओर से तबादला नीति को ही 14 जून को मंजूरी मिल पाई थी, जिसके चलते विभागों को स्थानांतरण के लिए केवल एक पखवारे का समय मिला।
कर्मचारियों और अधिकारियों का संपूर्ण डाटा मानव संपदा पोर्टल पर फीड होने के बाद शासन वार्षिक स्थानांतरण को पारदर्शी बनाने की कवायद में जुटा है। जिसके तहत नई वार्षिक स्थानांतरण नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद शासन की ओर से शासनादेश जारी किया गया है। नीति के तहत अब वार्षिक तबादला योग्यता के आधार पर होगा। जिसके लिए वरीयता निर्धारित करने को शासन ने विभागों को अप्रैल माह तक का समय दिया है।
इनको मिलेगी वरीयता और इनकी घटेगी दावेदारी
वार्षिक तबादला के लिए विभाग की ओर से अप्रैल माह तक शासनादेश के मुताबिक वरीयता निर्धारित की जाएगी और इसी वरीयता के आधार सीजन में तबादले किये जाएंगे।
नीति के मुताबिक वरीयता निर्धारण में कर्मचारी-अधिकारी के दिव्यांग होने की स्थिति में 20, पति-पत्नी दोनों के राजकीय सेवा में होने पर साथ तैनाती के लिए 20, स्वयं के गंभीर बीमार अथवा बच्चों के दिव्यांग होने पर 15,सेवानिवृत्ति की अवधि दो वर्ष से कम शेष होने पर 15 तथा पिछले तीन वर्ष की वार्षिक प्रविष्टियों में प्राप्त अंक के आधार पर औसत 10 अंक की वरीयता प्रदान की जाएगी।
वहीं विभाग अपनी विशेष कार्य प्रकृति के आधार पर वैकल्पिक 25 अंक समाहित कर सकता है। जबकि वरीयता सूची बनाते समय कर्मचारी-अधिकारी का लघु दंड होने पर 5 व पिछले तीन वर्ष में वृहद दंड होने की स्थति में 10 अंक की कटौती होगी।
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