मुरादाबाद : स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लक्ष्मण सिंह के घर तांगे से आए थे गांधी जी
पति लक्ष्मण सिंह की मौत के बाद धर्मवती ने झेले अपार कष्ट, गरीबी में घर बेचकर की चारों बेटियाें की शादी
कंपनीबाग स्थित शहीद स्मारक।
मुरादाबाद, अमृत विचार। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लक्ष्मण सिंह निर्भीक व निडर थे। अंग्रेजों को देखते ही वह ‘’भारत माता की जय, वंदे मातरम’’ के नारे लगाने लगते थे। वह परिवार में सबसे बड़े थे और इनके छोटे भाई रूप सिंह थे, जो खेती-किसानी देखते थे। उनकी पत्नी धर्मवती अब काफी बुजुर्ग हो चली हैं। वह बताती हैं कि आजादी के आंदोलन के दौर में पति लक्ष्मण सिंह के साथियों को भी खाना बनाकर खिलाती थीं। उस समय उन सभी की जिंदगी का एक ही मकसद आजादी था।
धर्मवती बताती हैं कि परिवार में कई गाय -भैंस पाली जाती थीं। घर में खूब दूध होता था। वह आंदोलनकारियों को भोजन संग दूध भी देती थीं। बताया कि एक समय उनके घर तांगे से महात्मा गांधी आए थे। वह सुबह के समय आए और शाम को वापस चले गए थे। धर्मवती ने बताया कि गांधी जी के कहने पर उन्होंने उन्हें भोजन में मूंग की दाल-रोटी खिलाई थी और दूध दिया था। गांधी जी के पास चरखा था, जिससे उन्होंने धर्मवती को सूत कातकर खादी के कपड़े बनाना सिखाया था। इसके बाद से वह खुद के सूत से बने कपड़े पहनने लगी थीं।
धर्मवती ने बताया कि चरखे से सूत कातना और कपड़े बुनना उन्हें आज भी आता है। गांधी जी ने उन्हें भयभीत न होने और सत्य बोलने की सीख दी थी। धर्मवती ने बताया कि उन दिनों लोग अंग्रेजों के विरुद्ध पूरे-पूरे दिन आंदोलन करने में ही व्यस्त रहते थे। इसी लगन में उनके पति लक्ष्मण सिंह कई-कई दिन घर नहीं आते थे। दो या तीन दिन बाद कहीं घर आकर भोजन करते थे। पुलिस भी पीछे पड़ी रहती थी। धर्मवती ने बताया कि आजादी के आंदोलन में उनके पति लक्ष्मण सिंह तीन महीने जेल में रहे थे। काली राम शास्त्री लक्ष्मण सिंह से सबसे निकट के दोस्त थे।
बिलारी के सफीलपुर में था मूल निवास
धर्मवती ने बताया कि पति लक्ष्मण सिंह की मौत के बाद चारों बेटियों की जिम्मेदारी उनके सिर आ गई थी। इनके बेटे नहीं थे, चार बेटियां ही हैं। बेटियों पूनम, कुसुम, सुमन व ललितेश का विवाह करना था। उनके पास धनाभाव भी था। बिलारी के सफीलपुर में उनका मूल निवास था। गांव की संपत्ति को बेचकर बेटियों के विवाह कर दिए। वर्तमान में वह चंदौसी में अपनी बड़ी बेटी पूनम के पास किराए वाले घर में रहती हैं। पूनम का पति जगदीश दुकान करते हैं। अब धर्मवती बिलारी में रहना चाहती हैं वहां उनकी एक बेटी रहती है। बताया कि उनकी दवा मुरादाबाद से ही चलती है, उन्हें नसों में दिक्कत रहती है। बताया कि उन्हें पेंशन के 15,000 रुपये मिलते हैं।
35 साल पहले पति की हो गई थी मौत
धर्मवती ने बताया कि अब उनकी आयु 90 साल से अधिक है। उनके पति लक्ष्मण सिंह की मृत्यु 35 साल पहले हो गई थी। उन्होंने बताया कि उनकी दवा में उन्हें कोई छूट नहीं मिलती है। बताया, आजादी के दौर में कांशीराम कॉलोनी में किराए पर ही रहती थीं। पति की मौत के बाद उन्हें तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बेटियों के विवाह में भी किसी की कोई मदद नहीं मिली। वैसे जब आजादी के आंदोलन का दौर था तो लोगों में एकजुटता दिखती थी। सभी लोग एक दूसरे की मदद करते थे लेकिन, अब वैसा दौर कहां है?
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