प्रयागराज : दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाने वाली कथित पीड़िता पर HC ने लगाया 10 हजार का जुर्माना
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दुष्कर्म और यौन अपराध का झूठा आरोप लगाने वाली महिला पर 10 हजार का जुर्माना लगाते हुए कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने और दुष्कर्म के झूठे गंभीर आरोप लगाने की प्रथा से सख्ती से निपटने की आवश्यकता है और इस तरह झूठे गंभीर आरोप लगाने की परंपरा को अनुमति नहीं दी जा सकती है।
ये आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की खंडपीठ ने शिवम कुमार पाल उर्फ सोनू पाल व तीन अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया और उनके खिलाफ पुलिस स्टेशन कोतवाली, प्रयागराज में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी। दरअसल याचियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शिवम और कथित बलात्कार पीड़िता ने विवाह कर लिया है और अब वे पति-पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे हैं। इसके साथ ही अदालत को यह भी बताया गया कि पीड़िता द्वारा पुलिस आयुक्त, प्रयागराज को एक आवेदन दिया गया, जिसमें उसने स्वीकार किया है कि आपस में कुछ मतभेद होने के कारण आवेश में आकर उसने झूठी प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
सभी पक्षों पर विचार करने के बाद अंत में कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकला कि झूठी प्राथमिकी केवल याचियों पर दबाव डालने के लिए दर्ज की गई थी, इसलिए याचियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करते हुए कोर्ट ने कथित पीड़िता को 10 दिनों की अवधि के अंदर 10 हजार का जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है।
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