सैकड़ों जर्जर मकान, गिरा नहीं पा रहे साहेबान, Kanpur Nagar Nigam में शिकायत आने के बाद भी अधिकारी नहीं ले रहे संज्ञान
कानपुर नगर निगम में 50 फीसदी शिकायतें सिर्फ जर्जर मकान गिराने की है।
कानपुर नगर निगम में 50 फीसदी शिकायतें सिर्फ जर्जर मकान गिराने की है। सीलन आने से आवेदक बढ़े। दर्जनों मकान गिरने की कगार पर है।
कानपुर, अमृत विचार। रुक-रुककर हो रही बारिश जर्जर मकानों में रह रहे लोगों की धड़कनों को बढ़ा रही है। मकानों में सीलन बढ़ रही है, जिस कारण नगर निगम में इन मकानों को गिराने के लिए पत्रों की बाढ़ आ गई है।
नगर निगम में दर्ज हो रही शिकायतों में हर दूसरी शिकायत जर्जर मकानों को गिराने की है। इससे नगर निगम अधिकारी परेशान हैं। अधिकारियों के अनुसार एक साथ इतने मकानों का सर्वे करना और फिर गिराने की अनुमति देना या उनपर कार्रवाई कराना मुमकिन नहीं हो पाता है।
नगर निगम के अनुसार शहर में 429 जर्जर और गिराऊ मकान चिन्हित किए गए हैं, इनमें सबसे ज्यादा 222 जर्जर मकान जोन एक में हैं। इन मकानों को खाली करने का नोटिस दिया जा चुका है। इन भवनों में करीब तीन हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। कई जर्जर भवनों में फैक्ट्री, गोदाम व बड़ी-बड़ी दुकानें तक चल रही हैं। पुराना कानपुर, कर्नलगंज, चमनगंज, बादशाहीनाका, ग्वालटोली, चंद्रनगर, जूही में ऐसे तमाम भवन हैं।
जून और जुलाई में बढ़ गईं शिकायतें
नई सड़क निवासी शबनम ने निवास संख्या 45/101 को गिराने के लिए पत्र लिखा है। इसी तरह अच्छे ने भी अपने जर्जर भवन संख्या 81/22 कोपरगंज कुली बाजार को गिराने के लिए पत्र लिखा है। जून और जुलाई दो महीने में ही 30 से अधिक पत्र नगर निगम पहुंचे हैं। लोगों का कहना है कि जर्जर भवनों में सीलन है। जिससे गिरने का खतरा है। इस साल ऐसे करीब सौ पत्र आ चुके हैं।
खुद ही गिराओ मकान, नहीं होगी जिम्मेदारी
परमट में भवन संख्या 13/342 एफ 80 वर्ष पुराना है, जिसमें कई किराएदार भी हैं। गिराऊ भवन की सूचना पर नगर निगम की टीम ने भौतिक जांच में पाया कि भवन का छज्जा और छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त है जिसे गिराना जरूरी है। नगर निगम अधिनियम के तहत मुख्य अभियंता ने मकान मालिक को नोटिस दी और खुद ही मकान गिरवाने के निर्देश दिए। चेतावनी भी दी कि यदि इस दौरान कोई दुर्घटना हुई तो उसकी पूरी जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी।
खर्च मकान मालिक देता
नगर निगम जर्जर भवनों को गिराने का खर्च मकान मालिक से ही लेता है। इसलिए इसपर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाती है। वहीं, कई मामलों में किराएदारी विवाद भी कोर्ट में हैं। इसलिए कार्रवाई नही हो पाती।
यहां पर सबसे ज्यादा गिराऊ मकान
लक्ष्मीपुरवा, लाठीमोहाल, सिरकीमोहाल, नौघड़ा, बांसमंडी, जवाहर नगर, नेहरू नगर, चंद्र नगर, पी रोड, अनवरगंज, बेकनगंज, बंदरिया हाता, लाटूश रोड, चमनगंज, फहीमाबाद, कछियाना, चटाई मोहाल, नयागंज, मनीराम बगिया, टोपी बाजार, मछलीबाजार, हरबंशमोहाल, जूही नहरिया क्षेत्र आदि।
जोन जर्जर मकान
जोन-1 222
जोन-2 06
जोन-3 42
जोन-4 120
जोन-5 18
जोन-6 22
कुल 430
गिराऊ और जर्जर भवनों को गिराने के लिए पत्र आते हैं। जिनपर नियमानुसार कार्रवाई होती है। कई मामले कोर्ट में हैं, जिसमें नगर निगम दखल नहीं दे सकता । जहां ज्यादा समस्या है वहां नोटिस दी जा रही हैं।- मनीष अवस्थी, मुख्य अभियंता
