अयोध्या: शासन के 19 पैरामीटर में खरे नहीं उतरे परिषदीय विद्यालय, बेमानी बना है आदेश

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Edited By Amrit Vichar
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अयोध्या, अमृत विचार। शासन की आपरेशन कायाकल्प के जरिए परिषदीय स्कूलों के तेवर व कलेवर बदलने की मंशा पर कई ग्राम प्रधान और बीडीओ ब्रेक लगा रहे हैं। हेडमास्टर द्वारा विद्यालय विकास योजना व व्यक्तिगत सूचनाएं देने के बावजूद आपरेशन कायाकल्प के कार्य नहीं कराए जा रहे हैं।  जिसके चलते कई विद्यालयों में आपरेशन कायाकल्प के 19 पैरामीटर्स पूरे नहीं हो पा रहे हैं। शासन ने आपरेशन कायाकल्प को प्राथमिकताओं में शामिल किया है। शासन के अलावा स्कूली शिक्षा महानिदेशक ने भी आपरेशन कायाकल्प समेत अन्य कार्यों की निगरानी के निर्देश दिए थे। 

शुरूआती दौर में कार्य काफी तेजी से हुए लेकिन धीरे -धीरे प्रधानों की प्राथमिकताएं बदल गई थीं। 2021 में नए ग्राम प्रधानों से उम्मीदें बंधी थीं लेकिन कई जगह हकीकत में नहीं बदलीं। अब भी तमाम ऐसे स्कूल हैं जहां दिए गए प्रस्तावों के अनुसार काम शुरू नहीं हो सके हैं। अनेक स्कूलों में पहले चरण में फ्लोर टाइलिंग करा दी गई लेकिन इसके बाद दूसरे कामों में उदासीनता बरती जा रही है। 

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बताते चलें कि पेयजल, बालक शौचालय, बालिका शौचालय, शौचालयों में पानी की व्यवस्था, शौचालय में टाइलीकरण, दिव्यांग शौचालय, मल्टीपल हैंडवाश यूनिट, क्लासरूम टाइलीकरण, ब्लैक बोर्ड, रसोई घर, विद्यालय की रंगाई पुताई, रैम्प एवं रेलिंग, क्लासरूम में विद्युत वायरिंग , सबमर्सिबल सप्लाई वाटर एवं चहारदीवारी मानकों के तहत निर्धारित किया गया है। 

बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा जोर लगाने के बाद भी अभी तक जिले के 1792 परिषदीय विद्यालयों में से अधिकतर में मानक नहीं पूरे किए गए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार राय ने बताया कि यह कार्य सतत प्रकिया के तहत चल रहे हैं। सभी स्कूलों में पैरामीटर पूरे हो इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

जर्जर भवनों का रंग रोगन कर हो रहा है कायाकल्प 

सोहावल। खंड शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों का बुरा हाल है। गिनती के विद्यालयों को मानक के अनुरूप बनाकर निरीक्षण के लिए विभागीय अधिकारियों ने आरक्षित कर रखा है। कई विद्यालय आज भी ऐसे है जहां भवन के नाम पर कुछ अतिरिक्त कक्ष ही मौजूद है। लगभग 180 विद्यालयों वाले खंड शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय तहसीनपुर में मुख्य भवन जर्जर होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

हैंड पम्प का दूषित पानी पीने को बच्चे मजबूर है। दिव्यांग रैम्प नदारद है तो प्रकाश व्यवस्था व स्वच्छ शौचालय आज तक नही बना। टूटे फूटे कमरों को रंग रोगन से चमकाया जा रहा है। बेनीपुर प्राथमिक विद्यालय दो भागों में बंटा है। एक भाग में रैम्प बना ही नही तो दूसरे खंड के भवन का रैम्प टूट चुका है। खेल किट नाम  सामानों की मौजूदगी विद्यालयों में शायद ही मिले। क्षेत्र में एक भी स्कूल ऐसा नहीं है जहां सभी 19 पैरामीटर पूरे होते हों।

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